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आलू उगाओ, खेत की टेंशन भूल जाओ
शिमला/ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2013 01:06 PM IST
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क्या आप आलू उगाने में दिलचस्पी रखते हैं? आपके पास खेत भी नहीं है तो अब इसकी टेंशन छोड़ दीजिए। शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र ने आलू की ऐसी किस्म तैयार की है, जिसको बिना मिट्टी के भी उगाया जा सकता है। इसके लिए खेत नहीं बल्कि एक प्लास्टिक बैग ही काफी है।
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आलू की इस किस्म की दूसरी खासियत यह है कि इसे बीमारी नहीं लगती है। इसके अलावा इसकी पैदावार भी आम आलू की किस्म से पांच गुना ज्यादा है। जी हां 'एरोपोनिक' तकनीक से तैयार यह किस्म हिमाचल समेत अन्य राज्यों के किसानों को जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी।
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केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तकनीक से निकलने वाला बीज सभी बीमारियों से मुक्त होगा, साथ ही उत्पादन में भी लगभग 5-6 गुना इजाफा होगा। अनुसंधान के वैज्ञानिकों द्वारा एरोपोनिक तकनीक से बीज निकालने की मेहनत सामने आ रही है और सीपीआरआई में इस बार एक्सपेरिमेंटल क्रॉप भी लगाई गई है। परिणामों से उत्साहित सीपीआरआई ने व्यापक स्तर पर आलू के बीज तैयार कर किसानों के लिए उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।
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केंद्रीय आलू अनुसंधान के निदेशक व वैज्ञानिक डॉ. बीरपाल सिंह के अनुसार एरोपोनिक तकनीक से निकलने वाला आलू पूरी तरह से वायरस और अन्य बीमारियों से मुक्त होगा। निदेशक की मानें, तो वर्तमान में उनके पास इस तकनीक को प्राप्त करने के लिए 3-4 आवेदन आए हैं, लेकिन अभी हमारा बिजनेस मॉड्यूल तैयार नहीं हुआ है। तकनीक प्राप्त करने वालों से कितने चार्ज लेने हैं यह तय होते ही हम आवेदनकर्ताओं को एरोपोनिक से बीज आलू निकालने की तकनीक साझा करेंगे।
क्या है एरोपोनिक तकनीक
इस तकनीक में आलू को बिना मिट्टी के उगाया जाता है। इसके लिए प्लास्टिक, थर्मोकोल या किसी ऐसी वस्तु के बाक्स बनाकर इसमें माइक्रो प्लांट डाले जाते हैं जिसमें 15 दिनों तक न्यूट्रीयंट सोल्यूशन (होगलेंट) पास किया जाता है ताकि जड़ों का विकास हो सके। एक बार जड़े आ जाए, उसके बाद पौधों की जड़ों में ट्यूबर बनना शुरू हो जाता है। इस तकनीक से बनने वाले आलू को एक साल तक नेट हाउस में लगाया जाता है जिसकी लगातार निगरानी की जाती है।