फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi News ›   youth targeted the civil evil

युवा उत्सव में सामाजिक कुरीतियों पर जमकर प्रहार

Thu, 15 Dec 2016 10:31 PM IST
मंडी
मंडी Updated Thu, 15 Dec 2016 10:31 PM IST
विज्ञापन
youth targeted the civil evil
राज्य स्तरीय युवा उत्सव में नाटक प्रस्तुत करते कांगड़ा के कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

मंडी। छोटी काशी में खेल विभाग के 33वें राज्यस्तरीय युवा उत्सव में प्रदेशभर के युवा रंगकर्मियों ने अपनी अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ी। वहीं सामाजिक कुरीतियों, व्यवस्था के दोगलेपन, अंधविश्वास, सम सामयिक घटनाक्रमों और आतंकवाद जैसे ज्वलंत मुद्दों को नाटकों के माध्यम से उठाकर यह संदेश दिया कि आज का युवा अपने आसपास की समस्याओं के प्रति न केवल जागरूक है बल्कि  उनके समाधान की दिशा में भी प्रयासरत है। युवा उत्सव के दौरान शिमला, मंडी, कुल्लू, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, कांगड़ा, बिलासपुर, चंबा आदि जिलों के युवा रंगकर्मियों ने अपने बेमिसाल अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

विज्ञापन


एक दूसरे को भी कड़ी टक्कर दी। विशेषकर मंडी जिला का डायन और सिरमौर का सुबह तो होने दो, इस युवा उत्सव की बेहतरीन प्रस्तुतियां रहीं। मंडी जिला के डायन नाटक में समाज के ठेकेदारों द्वारा एक महिला को डायन करार देकर उसका जीवन नर्क बना देने की दास्तां है। जब वही डायन सैकड़ों लोगों की जान बचाने के लिए ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर देती है तो उसे देवी के रूप में पूजा जाता है। वहीं सिरमौर जिला की प्रस्तुति इस्लामिक आतंकवाद की सच्चाई को उजागर करती है।
विज्ञापन


कौम के नाम पर आईएस, अलकायदा, हिजबुल मुजाहिदीन और सिमी जैसे आतंकी संगठनों की हकीकत को बयां करता यह नाटक बेहद प्रभावशाली रहा। विशेषकर कलाकारों की अदाकारी ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता है। यह तो बस ब्रेन वाश है जो जन्नत का सपना दिखाकर युवाओं का किया जा रहा है। जबकि हमीरपुर का वार्ड नंबर छह रूसी साम्यवादी शासन की कट्टरता को दर्शाता है। जिसमें अनेक बुद्धिजीवियों को पागल खाने में कैद कर उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक देकर प्रताड़ित किया जाता है और उनका पक्ष लेने वाली डाक्टर का भी वही हश्र किया जाता है। इसके अलावा कुल्लू जिला के जिजीविशा नाटक में रोहतांग दर्रे के उस पार की जिंदगी और नेपाली मजदूरों की मार्मिक दास्तां को नाटक में बयां किया गया। सोलन के गुड़ का हलवा, चंबा का एक नाटक ऐसा भी, शिमला का आखिर कब तक अपने-अपने स्तर पर प्रभावी प्रस्तुतियां रहीं। इससे उम्मीद जगती है कि हिमाचल में रंगमंच का भविष्य बेहतर है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed