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Mandi News: घरेलू हिंसा मामले में महिला को राहत, पति की अपील खारिज
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मंडी। सेशन जज मंडी की अपीलीय अदालत ने घरेलू हिंसा मामले में पत्नी को राहत देते हुए पति की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया है, जिसके तहत पीड़िता को 1500 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने और रहने के लिए एक कमरा, रसोई और बाथरूम उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया था। यदि आवास उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो पति को अतिरिक्त 1000 रुपये प्रतिमाह अदा करना होगा।
मामले के तथ्यों के अनुसार महिला ने 2021 में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला का विवाह 21 नवंबर 2020 को बल्ह क्षेत्र में एक व्यक्ति से हुआ था। विवाह के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष पर दहेज न लाने पर ताने, प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को महिला की याचिका स्वीकार कर उसे आर्थिक और आवासीय राहत दी थी। इसके खिलाफ पति, उसकी मां और पिता ने अपीलीय अदालत सेशन कोर्ट में अपील की थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पत्नी को शारीरिक हिंसा का सामना न करना पड़ा हो, लेकिन लगातार ताने और दहेज को लेकर दबाव मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति स्वस्थ और सक्षम है, इसलिए पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से वह पीछे नहीं हट सकता। तथ्यों के आधार पर अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की अपील को निरस्त कर दिया। संवाद
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मामले के तथ्यों के अनुसार महिला ने 2021 में घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला का विवाह 21 नवंबर 2020 को बल्ह क्षेत्र में एक व्यक्ति से हुआ था। विवाह के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष पर दहेज न लाने पर ताने, प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। ट्रायल कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को महिला की याचिका स्वीकार कर उसे आर्थिक और आवासीय राहत दी थी। इसके खिलाफ पति, उसकी मां और पिता ने अपीलीय अदालत सेशन कोर्ट में अपील की थी।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पत्नी को शारीरिक हिंसा का सामना न करना पड़ा हो, लेकिन लगातार ताने और दहेज को लेकर दबाव मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति स्वस्थ और सक्षम है, इसलिए पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से वह पीछे नहीं हट सकता। तथ्यों के आधार पर अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की अपील को निरस्त कर दिया। संवाद
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