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जिला में गंदम की फसल सूखे की चपेट में
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी, चैलचौक
Updated Sat, 09 Jan 2016 09:50 PM IST
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क्षेत्र में गंदम और सेब की बगीचे भयंकर सूखे की चपेट में आ गए हैं। एक सप्ताह के भीतर अगर बारिश नहीं होती है तो किसानों बागवानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। उपमंडल गोहर में करीब पांच हजार हेक्टेयर भू-भाग में गंदम की बिजाई की गई है। जहां सूखे की स्थिति बन गई है।
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वहीं सेब पौधों को गोबर खाद देने वाले सेब बागवान आसमान की ओर नजरें टिकाए हुए हैं। सेब बागवानों को सूखे के कारण भावी फसल की चिंता सताने लगी है। ऐसे मे अब कमरूघाटी के किसानों बागवानों ने जनपद के इंद्र देवता बड़ा देव कमरूनाग की शरण में जाने का फैसला लिया है। अगर बड़ा देव कमरूनाग भी नहीं मानते हैं तो किसानों और बागवानों की चिंता और अधिक बढ़ सकती है।
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क्षेत्र के बागवानों भोला राम ठाकुर, महेंद्र कुमार, हेम सिंह, लाभ सिंह ठाकुर, नारायण सिंह, चुनी लाल, लेखराज, वेद प्रकाश, देवी राम, हेमराज और चमन लाल ने बताया कि आजकल सेब के लिए बारिश होना बेहद जरूरी है। इन बागवानों ने बताया कि वे बड़ा देव कमरूनाग की शरण में जाने का मन बना रहे हैं।
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किसानों मुरारी लाल, शेर सिंह, दीनानाथ, पवन कुमार, नागराज, विजय कुमार और मनोज कुमार ने बताया कि उनकी गंदम की फसल सूखे से जूझ रही है। अगर एक सप्ताह में बारिश नहीं होती है तो किसान देव कमरूनाग की शरण में जाएंगे। जनवरी माह शुरू हो गया है मगर किसानों बागवानों के लिए अभी तक पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है। सूखे की स्थिति बनने से बागवानी और कृषि विशेषज्ञ भी चिंतित हो उठे हैं।
कृषि विषयवाद विशेषज्ञ गोहर खूबराम चौहान ने बताया कि गंदम की बिजाई को अभी कुछ ही समय हुआ है, मगर बारिश का होना इस समय जरूरी है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज का कहना है कि जनवरी में सेब बगीचों के लिए बारिश और बर्फबारी होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि बर्फबारी न होने से सेब पौधों में चिलिंग आवर्स पूरे नहीं होंगे। जिससे सेब की भावी फसल को नुकसान हो सकता है।