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Mandi News: जंगल का बेकार, अब रोजगार का आधार
Thu, 24 Jul 2025 12:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 24 Jul 2025 12:26 AM IST
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वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी में कार्यशाला में बनाए उत्पादों का अवलोकन करतीं छात्राएं और महिला
मंडी। जंगलों में हर मौसम में बिखरी रहने वाली चीड़ की सूखी पत्तियां, जिन्हें अब तक बेकार समझा जाता था, अब ग्रामीण महिलाओं और विद्यार्थियों के लिए रोजगार का आधार बन रही हैं। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी की वनस्पति विज्ञान प्रयोगशाला में उन्नत भारत अभियान (यूबीए) के तहत पांच दिवसीय ईको-फ्रेंडली पाइन क्राफ्ट एवं कृत्रिम फूल निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई।
इस कार्यशाला में 60 विद्यार्थियों के साथ धरयाणा, लरवाहन और सडयाना गांव की पांच महिलाओं ने भाग लेकर पाइन आर्ट की बारीकियां सीखीं। प्रतिभागियों को चीड़ की पत्तियों से राखियां, ड्रीम कैचर, डस्टबिन, प्लांटर और सजावटी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला की संयोजक और वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. तारा देवी सेन ने बताया कि यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जंगलों में बिखरी पत्तियों के प्रभावी उपयोग का नया मार्ग प्रशस्त करेगी।
मुख्य प्रशिक्षक संतोष सचदेवा ने कहा कि पाइन की पत्तियों से बने उत्पादों की देशभर में मांग बढ़ रही है। इससे छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ आय अर्जित कर सकते हैं। कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की पीएचडी स्कॉलर रितिका ने भी हिस्सा लिया और पाइन क्राफ्ट को व्यावसायिक रूप देने के तरीके सीखे।
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समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि यदि लोग इस दिशा में कदम बढ़ाएं तो यह पहल वन अपशिष्ट को ‘वेल्थ’ में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह हुनर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान करेगा।
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इस कार्यशाला में 60 विद्यार्थियों के साथ धरयाणा, लरवाहन और सडयाना गांव की पांच महिलाओं ने भाग लेकर पाइन आर्ट की बारीकियां सीखीं। प्रतिभागियों को चीड़ की पत्तियों से राखियां, ड्रीम कैचर, डस्टबिन, प्लांटर और सजावटी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला की संयोजक और वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. तारा देवी सेन ने बताया कि यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जंगलों में बिखरी पत्तियों के प्रभावी उपयोग का नया मार्ग प्रशस्त करेगी।
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मुख्य प्रशिक्षक संतोष सचदेवा ने कहा कि पाइन की पत्तियों से बने उत्पादों की देशभर में मांग बढ़ रही है। इससे छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ आय अर्जित कर सकते हैं। कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की पीएचडी स्कॉलर रितिका ने भी हिस्सा लिया और पाइन क्राफ्ट को व्यावसायिक रूप देने के तरीके सीखे।
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समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि यदि लोग इस दिशा में कदम बढ़ाएं तो यह पहल वन अपशिष्ट को ‘वेल्थ’ में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह हुनर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान करेगा।