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Mandi News: जिंदगियां बचाने दौड़े ग्रामीण, बस से निकालकर पहुंचाए अस्पताल
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सरकाघाट के तरांगला गलू में हुए बस हादसे के दौरान खुलकर आगे पड़ी स्टपनी। स्त्रोत - जागरूक पाठक
सरकाघाट (मंडी)। क्षेत्र के तरांगला गलू में एचआरटीसी की बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलते ही आसपास के गांव के ग्रामीण मौके के लिए दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और जैसे कैसे सड़क तक पहुंचाया। निजी वाहनों से सरकाघाट अस्पताल भी पहुंचाया। ग्रामीणों की मुस्तैदी से कई जानें बच गईं। हादसे के बाद पूरा इलाका चीख पुकार से गूंज उठा। इससे राहत कार्यों में जुटे लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
घटनास्थल में चीखें, लहूलुहान लोग और हताश आंखें ही नजर आईं। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से घायलों को निकालने की कोशिश की। हर कोई बस एक ही कोशिश कर रहा था कि किसी की जिंदगी बच जाए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना भयानक था कि कुछ देर के लिए सब कुछ थम गया। हम काम कर रहे थे तभी एक जोर की आवाज आई। पहुंचे तो देखा बस खाई में गिरी हुई थी।
लोगों की चीखें दिल को चीर रही थीं। प्रशासन की टीमें और एंबुलेंस बाद में पहुंची, लेकिन तब तक स्थानीय लोगों ने मानवता का फर्ज निभाना शुरू कर दिया था। ग्रामीण महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिल कर घायलों को सड़क तक पहुंचाया। घटनास्थल पर उमड़ी भीड़ घायलों की खैरियत पूछती रही। बस हादसे के बाद 108 एंबुलेंस देरी से मौके पर पहुंचने से ग्रामीणों में भारी रोष दिखा। ग्रामीणों ने घायलों को सड़क से गुजर रहे वाहनों और अपने निजी वाहनों में डाल कर अस्पताल पहुंचाया।
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घटना के बाद सड़क पर गुजरने वालों वाहन रुकने से सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय युवाओं की तत्परता से वाहनों को निकाल कर एंबुलेंस और अन्य वाहनों की आवाजाही सुचारु करवाई गई।
उधर, मसेरन पंचायत के प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण राहत कार्य में जुटे और इंसानियत का परिचय दिया। घटना में कुछ मौतें हुई हैं लेकिन ग्रामीणों की मुस्तैदी से कई जानें बच गईं।
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सरकाघाट अस्पताल में भी चीख पुकार
हादसे के बाद परिजन भी अपनों की सलामती के लिए अस्पताल पहुंचे। सरकाघाट अस्पताल परिसर में चीख पुकार मची रही। मरीज के रेफर होने और मृत घोषित होने के बाद परिजनों की चीख पुकार से माहौल गमगीन हो गया। भीड़ अधिक होने से अफरा तफरी भी रही।
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आसपास की 10 एंबुलेंसों ने संभाला मोर्चा
हादसे का पता चलते ही सरकाघाट और आसपास के इलाकों की 10 एंबुलेंस को मौके के लिए भेजा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 108 के अलावा 102 एंबुलेंस भी राहत कार्यों में लगा दी गईं। रिवालसर से भी एंबुलेंस भेजी गई। मौके पर ग्रामीणों की मुस्तैदी से अधिकतर घायलों को निजी वाहनों से भेजा गया।
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घटनास्थल में चीखें, लहूलुहान लोग और हताश आंखें ही नजर आईं। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से घायलों को निकालने की कोशिश की। हर कोई बस एक ही कोशिश कर रहा था कि किसी की जिंदगी बच जाए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसा इतना भयानक था कि कुछ देर के लिए सब कुछ थम गया। हम काम कर रहे थे तभी एक जोर की आवाज आई। पहुंचे तो देखा बस खाई में गिरी हुई थी।
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लोगों की चीखें दिल को चीर रही थीं। प्रशासन की टीमें और एंबुलेंस बाद में पहुंची, लेकिन तब तक स्थानीय लोगों ने मानवता का फर्ज निभाना शुरू कर दिया था। ग्रामीण महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिल कर घायलों को सड़क तक पहुंचाया। घटनास्थल पर उमड़ी भीड़ घायलों की खैरियत पूछती रही। बस हादसे के बाद 108 एंबुलेंस देरी से मौके पर पहुंचने से ग्रामीणों में भारी रोष दिखा। ग्रामीणों ने घायलों को सड़क से गुजर रहे वाहनों और अपने निजी वाहनों में डाल कर अस्पताल पहुंचाया।
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घटना के बाद सड़क पर गुजरने वालों वाहन रुकने से सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय युवाओं की तत्परता से वाहनों को निकाल कर एंबुलेंस और अन्य वाहनों की आवाजाही सुचारु करवाई गई।
उधर, मसेरन पंचायत के प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण राहत कार्य में जुटे और इंसानियत का परिचय दिया। घटना में कुछ मौतें हुई हैं लेकिन ग्रामीणों की मुस्तैदी से कई जानें बच गईं।
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सरकाघाट अस्पताल में भी चीख पुकार
हादसे के बाद परिजन भी अपनों की सलामती के लिए अस्पताल पहुंचे। सरकाघाट अस्पताल परिसर में चीख पुकार मची रही। मरीज के रेफर होने और मृत घोषित होने के बाद परिजनों की चीख पुकार से माहौल गमगीन हो गया। भीड़ अधिक होने से अफरा तफरी भी रही।
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आसपास की 10 एंबुलेंसों ने संभाला मोर्चा
हादसे का पता चलते ही सरकाघाट और आसपास के इलाकों की 10 एंबुलेंस को मौके के लिए भेजा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 108 के अलावा 102 एंबुलेंस भी राहत कार्यों में लगा दी गईं। रिवालसर से भी एंबुलेंस भेजी गई। मौके पर ग्रामीणों की मुस्तैदी से अधिकतर घायलों को निजी वाहनों से भेजा गया।
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