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Mandi News: पांडवशिला-रूशाड़ सड़क विवाद में ग्रामीणों का चक्का जाम
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पांडवशीला में सड़क विवाद को लेकर जुटे ग्रामीण। इन्हें समझाते डीएसपी गौरवजीत। स्त्रोत- जागरूक प
थुनाग (मंडी)। पांडवशिला-रूशाड़ धार सड़क विवाद पर ग्रामीणों ने वीरवार को चैल-जंजैहली मार्ग पर हंगामा किया। ग्रामीणों ने वन विभाग की ओर से एलएनटी मशीन जब्त करने और सड़क मरम्मत रोकने के विरोध में दोपहर 12:30 बजे से पांडवशिला पर चक्का जाम कर दिया। चार घंटे से अधिक समय तक चले इस जाम ने दोनों ओर सैकड़ों वाहनों को फंसा दिया। इससे यातायात पूरी तरह से ठप हो गया।
यात्रियों, मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आपातकालीन सेवाएं, विशेषकर एंबुलेंस प्रभावित हुईं, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया। बीते 30 जून की आपदा ने इस सड़क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। यह सड़क 20 साल पहले पीएमजीएसवाई के तहत बनी थी। तीन महीने से बंद इस मार्ग ने ग्रामीणों का जीवन ठप कर दिया है। बच्चे लंबा पैदल सफर कर स्कूल जा रहे हैं, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित है।
ग्रामीणों ने अपनी जेब से पैसे जुटाकर मलबा हटाने के लिए एलएनटी मशीन लगाई, लेकिन वन विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) उल्लंघन का हवाला देकर काम रुकवाया और मशीन जब्त कर ली।
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एक जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 7 अक्तूबर तक सड़क को एंबुलेंस योग्य बनाने का आदेश दिया था, लेकिन वन विभाग की रोक ने ग्रामीणों को सड़क पर उतरने को मजबूर किया।
पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर ने कहा कि पीडब्ल्यूडी और प्रशासन की उदासीनता बर्दाश्त नहीं है। डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने एफसीए उल्लंघन और जांच का जिक्र किया। कार्यकारी एसडीएम बचित्र सिंह ठाकुर और डीएसपी करसोग गौरवजीत सिंह ने सड़क का पैदल निरीक्षण किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। एसडीएम ने हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक कोई हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया। संवाद
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यात्रियों, मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आपातकालीन सेवाएं, विशेषकर एंबुलेंस प्रभावित हुईं, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया। बीते 30 जून की आपदा ने इस सड़क को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। यह सड़क 20 साल पहले पीएमजीएसवाई के तहत बनी थी। तीन महीने से बंद इस मार्ग ने ग्रामीणों का जीवन ठप कर दिया है। बच्चे लंबा पैदल सफर कर स्कूल जा रहे हैं, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित है।
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ग्रामीणों ने अपनी जेब से पैसे जुटाकर मलबा हटाने के लिए एलएनटी मशीन लगाई, लेकिन वन विभाग ने वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) उल्लंघन का हवाला देकर काम रुकवाया और मशीन जब्त कर ली।
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एक जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 7 अक्तूबर तक सड़क को एंबुलेंस योग्य बनाने का आदेश दिया था, लेकिन वन विभाग की रोक ने ग्रामीणों को सड़क पर उतरने को मजबूर किया।
पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर ने कहा कि पीडब्ल्यूडी और प्रशासन की उदासीनता बर्दाश्त नहीं है। डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने एफसीए उल्लंघन और जांच का जिक्र किया। कार्यकारी एसडीएम बचित्र सिंह ठाकुर और डीएसपी करसोग गौरवजीत सिंह ने सड़क का पैदल निरीक्षण किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। एसडीएम ने हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक कोई हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया। संवाद