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Mandi News: पंचायत चुनाव में अनोखी जीत, बहू प्रधान तो 96 साल के ससुर बने उपप्रधान
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सुंदरनगर की चनौल पंचायत में फिर कायम रहा परिवार का दबदबा
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर विकास खंड की चनौल पंचायत में बहू और ससुर की जोड़ी ने चुनाव जीतकर अलग पहचान बनाई है। पंचायत चुनाव में 53 वर्षीय नीलम प्रधान निर्वाचित हुई हैं। जबकि उनके 96 वर्षीय ससुर शंकर सिंह लगातार चौथी बार उपप्रधान चुने गए हैं। दोनों पिछले लंबे समय से पंचायत राजनीति में सक्रिय हैं और क्षेत्र की जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
शंकर सिंह वर्ष 1973 से पंचायती राज चुनाव लड़ते आ रहे हैं। वह कई बार पंचायत प्रधान भी रह चुके हैं। पिछले 16 वर्षों से लगातार चनौल पंचायत के उपप्रधान पद पर काबिज हैं और इस बार भी जनता ने उन पर भरोसा जताया। वहीं, उनकी बहू नीलम ने वर्ष 2010 में पहली बार पंचायत प्रधान का चुनाव जीता था। इसके बाद वर्ष 2015 में जिला परिषद सदस्य चुनीं गईं। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने फिर वापसी करते हुए प्रधान पद हासिल कर लिया।
दिलचस्प बात यह है कि नीलम भाजपा विचारधारा से जुड़ी मानी जाती हैं। जबकि उनके ससुर शंकर सिंह कांग्रेस समर्थक रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद दोनों ने पंचायत स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई हुई है। 96 वर्ष की उम्र में भी शंकर सिंह का उत्साह और सक्रियता युवाओं को प्रेरित कर रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर विकास खंड की चनौल पंचायत में बहू और ससुर की जोड़ी ने चुनाव जीतकर अलग पहचान बनाई है। पंचायत चुनाव में 53 वर्षीय नीलम प्रधान निर्वाचित हुई हैं। जबकि उनके 96 वर्षीय ससुर शंकर सिंह लगातार चौथी बार उपप्रधान चुने गए हैं। दोनों पिछले लंबे समय से पंचायत राजनीति में सक्रिय हैं और क्षेत्र की जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
शंकर सिंह वर्ष 1973 से पंचायती राज चुनाव लड़ते आ रहे हैं। वह कई बार पंचायत प्रधान भी रह चुके हैं। पिछले 16 वर्षों से लगातार चनौल पंचायत के उपप्रधान पद पर काबिज हैं और इस बार भी जनता ने उन पर भरोसा जताया। वहीं, उनकी बहू नीलम ने वर्ष 2010 में पहली बार पंचायत प्रधान का चुनाव जीता था। इसके बाद वर्ष 2015 में जिला परिषद सदस्य चुनीं गईं। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार उन्होंने फिर वापसी करते हुए प्रधान पद हासिल कर लिया।
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दिलचस्प बात यह है कि नीलम भाजपा विचारधारा से जुड़ी मानी जाती हैं। जबकि उनके ससुर शंकर सिंह कांग्रेस समर्थक रहे हैं। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद दोनों ने पंचायत स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई हुई है। 96 वर्ष की उम्र में भी शंकर सिंह का उत्साह और सक्रियता युवाओं को प्रेरित कर रही है।
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