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Mandi News: महिलाओं के पारपंरिक उत्पादों को बीकानेर में मिली पहचान
Sun, 19 Oct 2025 06:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sun, 19 Oct 2025 06:35 AM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। राजस्थान के बीकानेर में हिमाचल के हस्तशिल्प एवं हथकरघा प्रदर्शनी के बाजार में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वावलंबन, नारी सशक्तीकरण पर अलग पहचान देखने को मिली। 11 से 18 अक्तूबर तक हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष रूप से आरक्षित दो एक्सक्लूसिव स्टॉल में हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित, पारंपरिक और ऑर्गेनिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया।
बीकानेर के ग्रामीण हाट में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति और घरेलू उत्पादों का शानदार प्रदर्शन किया। जोगिंद्रनगर से संबंध रखने वाली अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह की संचालिका गीतांजलि गोस्वामी ने हिमाचल के पारंपरिक और प्रामाणिक उत्पादों को हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन में भव्य रूप से प्रस्तुत किया। इस दौरान देवभूमि हिमाचल के पहाड़ी सीरा, सेपू बड़ी, सीबकथॉर्न, पहाड़ी लहसुन, पहाड़ी अचार, हैंडमेड बिस्किट्स, कांगड़ा टी के अलाव हिमाचली पुल्ले चप्पल, कुल्लू टोपी, शॉल, मफलर, मोजे, बांस की टोकरियां, चंबा ऑर्गेनिक साबुन, हैंडमेड अशोक स्तंभ और मॉर्निंग किट जैसे अनोखे उत्पाद हाथों हाथ बिके।
समूह के अधीन आने वाली करीब 130 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी गीताजंलि ने बताया कि राजस्थान के बीकानेर में प्रशिक्षित महिलाओं के सहयोग से तैयार किए गए उत्पादों को स्वावलंबन भी मिला है। उधर, बीडीओ चौंतड़ा अभिनव तनवर ने बताया कि पंजीकृत स्वयं सहायता समूह के हस्तशिल्प एवं हथकरघा प्रदर्शनी के बाजार में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के पारंपरिक उत्पादों को देशभर में पहचान मिल रही है इससे महिलाओं का स्वावलंबन भी बढ़ा है।
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बीकानेर के ग्रामीण हाट में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति और घरेलू उत्पादों का शानदार प्रदर्शन किया। जोगिंद्रनगर से संबंध रखने वाली अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह की संचालिका गीतांजलि गोस्वामी ने हिमाचल के पारंपरिक और प्रामाणिक उत्पादों को हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन में भव्य रूप से प्रस्तुत किया। इस दौरान देवभूमि हिमाचल के पहाड़ी सीरा, सेपू बड़ी, सीबकथॉर्न, पहाड़ी लहसुन, पहाड़ी अचार, हैंडमेड बिस्किट्स, कांगड़ा टी के अलाव हिमाचली पुल्ले चप्पल, कुल्लू टोपी, शॉल, मफलर, मोजे, बांस की टोकरियां, चंबा ऑर्गेनिक साबुन, हैंडमेड अशोक स्तंभ और मॉर्निंग किट जैसे अनोखे उत्पाद हाथों हाथ बिके।
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समूह के अधीन आने वाली करीब 130 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी गीताजंलि ने बताया कि राजस्थान के बीकानेर में प्रशिक्षित महिलाओं के सहयोग से तैयार किए गए उत्पादों को स्वावलंबन भी मिला है। उधर, बीडीओ चौंतड़ा अभिनव तनवर ने बताया कि पंजीकृत स्वयं सहायता समूह के हस्तशिल्प एवं हथकरघा प्रदर्शनी के बाजार में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के पारंपरिक उत्पादों को देशभर में पहचान मिल रही है इससे महिलाओं का स्वावलंबन भी बढ़ा है।
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