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पानी की गर्मी में भी नहीं रहेगी कमी, बोरवेल तकनीक से होगी लिफ्टिंग
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सोन खड्ड में तैयार इंटेक स्ट्रक्चर
- फोटो : Mandi
मंडी/धर्मपुर। गर्मी में जलस्तर घटने से जिले में पेयजल सप्लाई बाधित नहीं होगी। इसके अलावा सिंचाई योजनाओं के लिए भी पानी की कमी नहीं आएगी। यह प्राकृतिक जल स्रोतों पर बनी उठाऊ पेयजल योजनाओं में इंटेक स्ट्रक्चर से संभव होगा।
इसमें खास बात यह रहेगी की पानी को सीधे पेयजल स्रोतों से लिफ्ट नहीं किया जाएगा। बोरवेल यानी भूमिगत पानी को निकाला जाएगा। इसमें हैंडपंप वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा। नदी, नालों और खड्डों का जलस्तर बेहद कम होने के बावजूद बोरवेल तकनीक से पानी लिफ्ट किया जाएगा। जलजीवन मिशन योजना के तहत पेयजल योजनाओं के इंटेक स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सिंचाई योजनाओं के स्ट्रक्चर बन रहे हैं। इस आधुनिक तकनीक का धर्मपुर विस क्षेत्र में ट्रायल किया जा रहा है। इसके सफल होने के बाद जिला भर में यह व्यवस्था लागू होगी।
इस तरह से काम करेगी तकनीक
इंटेक स्ट्रक्चर उठाऊ पेयजल और सिंचाई योजना के लिए एक बेहतरीन तकनीक है। इसमें जलस्तर जब तक पूरी तरह से समाप्त न हो जाए तब तक उठाऊ जल योजना प्रभावित नहीं होती। इनटेक स्ट्रक्चर खड्ड, दरिया या नालों के ऐसे कोने पर बनाया जाता है, जहां पानी का पूरा रिसाव होता है। यहां हैंडपंप तकनीक की तरह बोरवेल करके पाइप बिछाई जाती है। इस स्ट्रक्चर में एक पंप स्थापित किया जाता है। इसका कंट्रोल ढांचे के टॉप पर रहता है। वहीं से इसे मेन पंप हाउस तक ले जाया जाता है। यहां से इसे लिफ्ट करके सप्लाई टैंक तक लिफ्ट करके आगे बांट दिया जाता है। इसके उपयोग के लिए छोटी लाइनों से आगे पानी की सप्लाई होती है।
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बहरी-धवाली-मढ़ी पेयजल योजना के लिए इस तकनीक से स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा हैं। इसके अलावा चलाल के पास सोन खड्ड में सिंचाई योजना कलस्वाईं भी इसी तकनीक से बनाई जा रही है। चौस ब्रिज, बहरी और संधोल में भी काम चल रहा है। प्रथम चरण से बाद मुख्य टैंक तक सप्लाई दी जाएगी। स्ट्रक्चर से पानी लिफ्ट किया जाएगा। इसमें लंबे समय तक पानी की उपलब्धता रहने की संभावना रहती है। जब तक भूमिगत जलस्तर शून्य नहीं हो जाता तब तक पानी उठाया जा सकता है। इससे जल योजना प्रभावित नहीं होती है।
राकेश पराशर, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग, धर्मपुर
1.70 करोड़ से बनेगा एक स्ट्रक्चर
प्रत्येक इनटेक स्ट्रक्चर पर 1.70 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 1.2 करोड़ भवन का ढांचा खड़ा करने में और अन्य बोरवेल आदि में पचास लाख रुपए खर्च आता है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत भौतिक, वित्तीय प्रगति और निधि उपयोग की बेहतर क्षमता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए हिमाचल को सबसे ज्यादा प्रोत्साहन राशि मिली है। देश के सात राज्यों को आवंटित 464.28 करोड़ रुपये में से सर्वाधिक 221.28 करोड़ रुपये हिमाचल को मिले हैं। इसके तहत अन्य योजनाओं पर भी काम चल रहा है। प्रत्येक घर में नल पहुंचाने और हर खेत को सिंचाई सुविधा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महेंद्र सिंह ठाकुर, जलशक्ति मंत्री
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इसमें खास बात यह रहेगी की पानी को सीधे पेयजल स्रोतों से लिफ्ट नहीं किया जाएगा। बोरवेल यानी भूमिगत पानी को निकाला जाएगा। इसमें हैंडपंप वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा। नदी, नालों और खड्डों का जलस्तर बेहद कम होने के बावजूद बोरवेल तकनीक से पानी लिफ्ट किया जाएगा। जलजीवन मिशन योजना के तहत पेयजल योजनाओं के इंटेक स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सिंचाई योजनाओं के स्ट्रक्चर बन रहे हैं। इस आधुनिक तकनीक का धर्मपुर विस क्षेत्र में ट्रायल किया जा रहा है। इसके सफल होने के बाद जिला भर में यह व्यवस्था लागू होगी।
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इस तरह से काम करेगी तकनीक
इंटेक स्ट्रक्चर उठाऊ पेयजल और सिंचाई योजना के लिए एक बेहतरीन तकनीक है। इसमें जलस्तर जब तक पूरी तरह से समाप्त न हो जाए तब तक उठाऊ जल योजना प्रभावित नहीं होती। इनटेक स्ट्रक्चर खड्ड, दरिया या नालों के ऐसे कोने पर बनाया जाता है, जहां पानी का पूरा रिसाव होता है। यहां हैंडपंप तकनीक की तरह बोरवेल करके पाइप बिछाई जाती है। इस स्ट्रक्चर में एक पंप स्थापित किया जाता है। इसका कंट्रोल ढांचे के टॉप पर रहता है। वहीं से इसे मेन पंप हाउस तक ले जाया जाता है। यहां से इसे लिफ्ट करके सप्लाई टैंक तक लिफ्ट करके आगे बांट दिया जाता है। इसके उपयोग के लिए छोटी लाइनों से आगे पानी की सप्लाई होती है।
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बहरी-धवाली-मढ़ी पेयजल योजना के लिए इस तकनीक से स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा हैं। इसके अलावा चलाल के पास सोन खड्ड में सिंचाई योजना कलस्वाईं भी इसी तकनीक से बनाई जा रही है। चौस ब्रिज, बहरी और संधोल में भी काम चल रहा है। प्रथम चरण से बाद मुख्य टैंक तक सप्लाई दी जाएगी। स्ट्रक्चर से पानी लिफ्ट किया जाएगा। इसमें लंबे समय तक पानी की उपलब्धता रहने की संभावना रहती है। जब तक भूमिगत जलस्तर शून्य नहीं हो जाता तब तक पानी उठाया जा सकता है। इससे जल योजना प्रभावित नहीं होती है।
राकेश पराशर, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग, धर्मपुर
1.70 करोड़ से बनेगा एक स्ट्रक्चर
प्रत्येक इनटेक स्ट्रक्चर पर 1.70 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। 1.2 करोड़ भवन का ढांचा खड़ा करने में और अन्य बोरवेल आदि में पचास लाख रुपए खर्च आता है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत भौतिक, वित्तीय प्रगति और निधि उपयोग की बेहतर क्षमता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए हिमाचल को सबसे ज्यादा प्रोत्साहन राशि मिली है। देश के सात राज्यों को आवंटित 464.28 करोड़ रुपये में से सर्वाधिक 221.28 करोड़ रुपये हिमाचल को मिले हैं। इसके तहत अन्य योजनाओं पर भी काम चल रहा है। प्रत्येक घर में नल पहुंचाने और हर खेत को सिंचाई सुविधा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महेंद्र सिंह ठाकुर, जलशक्ति मंत्री