{"_id":"61549e668ebc3e095b7f9e91","slug":"the-way-to-win-the-by-election-will-emerge-from-mandi-mandi-news-sml385602029","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडी से निकलेगा लोकसभा उपचुनाव की जीत का रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडी से निकलेगा लोकसभा उपचुनाव की जीत का रास्ता
विज्ञापन
The way to win the by-election will emerge from Mandi
मंडी। आखिरकार साढ़े सात महीने के बाद दो नवंबर को मंडी को नया सांसद मिल जाएगा। कांग्रेस और भाजपा की जीत के लिए मंडी बेहद अहम होगा। संसदीय क्षेत्र मंडी में 12 लाख 85 हजार 903 मतदाता हैं। इसमें से 8 लाख 15 हजार 463 मतदाता अकेले मंडी जिले में हैं।
ऐसे में किसी भी पार्टी के प्रत्याशी की जीत के लिए सीएम के गृह जिला मंडी के मतदाता मुख्य भूमिका निभाएंगे। उधर चुनावी बिगुल बजते ही टिकट के तलबगारों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। जहां तक कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों की बात है तो कांग्रेस में वीरभद्र और पंडित सुख राम परिवार में टिकट को लेकर आमने-सामने हैं। पंडित सुखराम अपने पौत्र आश्रय शर्मा को टिकट दिलाना चाहते हैं। वे इसके लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक को चुनौती दे चुके हैं। दूसरी तरफ वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह भी टिकट के लिए खुल कर सामने आ चुकी हैं। वे दिल्ली तक हो आई हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी प्रतिभा सिंह की पैरवी कर रही है। वह प्रदेश के सबसे कदावर नेता वीरभद्र सिंह के निधन से उपजी सहानुभूति की लहर पर सवार होकर खोई प्रतिष्ठा हासिल करना चाहती है।
विज्ञापन
स्वयं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर कई मंचों से प्रतिभा सिंह के नाम का संकेत दे चुके हैं। कांग्रेस प्रतिभा को उतार कर वीरभद्र सिंह के नाम पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसे में सुखराम परिवार की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। बता दें कि दोनों परिवारों जिनमें चार दशक से भी अधिक समय तक एक ही दल में रहते हुए छत्तीस का आंकड़ा रहा है और ऐसे में इस बार फिर तलवारें खिंच सकती हैं। जहां तक भाजपा की बात है तो वहां भी टिकट के तलबगारों की लंबी फेहरिस्त है। जिस तरह से लगातार भाजपा सब जगह पर चौंकाने वाले फैसले ले रही है तो यह क्रम मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में भी उम्मीदवार को लेकर जारी रह सकता है।
प्रत्याशियों के चयन के बाद ही मंडी संसदीय क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बैठेंगे। मंडी संसदीय क्षेत्र में मंडी जिले की 9, कुल्लू की 4, चंबा की एक, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और शिमला जिले की एक विधानसभा सीट है। ऐसे में 6 जिलों पर इस चुनाव का सीधा असर है।
विज्ञापन
ऐसे में किसी भी पार्टी के प्रत्याशी की जीत के लिए सीएम के गृह जिला मंडी के मतदाता मुख्य भूमिका निभाएंगे। उधर चुनावी बिगुल बजते ही टिकट के तलबगारों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। जहां तक कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों की बात है तो कांग्रेस में वीरभद्र और पंडित सुख राम परिवार में टिकट को लेकर आमने-सामने हैं। पंडित सुखराम अपने पौत्र आश्रय शर्मा को टिकट दिलाना चाहते हैं। वे इसके लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक को चुनौती दे चुके हैं। दूसरी तरफ वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह भी टिकट के लिए खुल कर सामने आ चुकी हैं। वे दिल्ली तक हो आई हैं।
विज्ञापन
प्रदेश कांग्रेस कमेटी भी प्रतिभा सिंह की पैरवी कर रही है। वह प्रदेश के सबसे कदावर नेता वीरभद्र सिंह के निधन से उपजी सहानुभूति की लहर पर सवार होकर खोई प्रतिष्ठा हासिल करना चाहती है।
विज्ञापन
स्वयं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर कई मंचों से प्रतिभा सिंह के नाम का संकेत दे चुके हैं। कांग्रेस प्रतिभा को उतार कर वीरभद्र सिंह के नाम पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसे में सुखराम परिवार की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। बता दें कि दोनों परिवारों जिनमें चार दशक से भी अधिक समय तक एक ही दल में रहते हुए छत्तीस का आंकड़ा रहा है और ऐसे में इस बार फिर तलवारें खिंच सकती हैं। जहां तक भाजपा की बात है तो वहां भी टिकट के तलबगारों की लंबी फेहरिस्त है। जिस तरह से लगातार भाजपा सब जगह पर चौंकाने वाले फैसले ले रही है तो यह क्रम मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में भी उम्मीदवार को लेकर जारी रह सकता है।
प्रत्याशियों के चयन के बाद ही मंडी संसदीय क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बैठेंगे। मंडी संसदीय क्षेत्र में मंडी जिले की 9, कुल्लू की 4, चंबा की एक, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और शिमला जिले की एक विधानसभा सीट है। ऐसे में 6 जिलों पर इस चुनाव का सीधा असर है।