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Mandi News: 11 माह से फाइलों में ही घूम रहा पंडोह में बनने वाला नया पुल
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पिछली बरसात में बह गया था यहां बना पुराना लाल पुल, नए पुल के लिए विभाग ने भेजी है 21 करोड़ रुपये की डीपीआर
अभी तक नहीं मिल पाई मंजूरी, यहां बनाया गया अस्थायी झूला पुल भी हुआ खराब
ग्रामीण बेबस, आठ किमी घूमकर करना पड़ रहा सफर
रिपीट संशोधित खबर...
सौरभ कुमार
पंडोह (मंडी)। पिछली बरसात में आपदा के दौरान पंडोह में हुए नुकसान के जख्म अभी तक हरे हैं। द्रंग विधानसभा के इलाका बदार की नौ पंचायतों और पंडोह बाजार को जोड़ने वाला 100 साल पुराना पंडोह का लाल पुल पिछली बरसात में बह गया है। इसकी जगह बनने वाला नया पुल 11 माह से फाइलों में ही इधर-उधर घूम रहा है। हालत यह है कि अब यहां पर बनाया गया अस्थायी झूला पुल भी खराब है। ऐसे में ग्रामीण बेबस हैं और आठ किमी घूमकर पंडोह पहुंचने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात यह है कि दो माह बाद फिर से बरसात शुरू होने वाली है, लेकिन पुराने जख्मों में सही तरीके से मरहम नहीं लग पाया है। 100 साल पुराना लाल पुल बहने के बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से लाखों रुपये खर्च कर इस स्थान पर एक अस्थायी झूला पुल लगाया था। इस पर बैठकर लोग आर पार हो रहे थे। मगर अब मात्र दो माह बाद ही यह झूला पुल भी खराब हो गया है।
इलाका बदार निवासी टेकचंद, गोपाल ठाकुर, पंडोह बाजार के कारोबारी रोहित कुमार, केवल कृष्ण, रमन, अश्वनी पठानिया आदि ने बताया कि ब्यास नदी पर बीते वर्ष बाढ़ में बहे पुल का काम 11 माह बाद भी शुरू न होने से पंडोह व द्रंग क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। कहा कि मौजूदा समय में द्रंग क्षेत्र की 9 पंचायत के लोगों को पंडोह पहुंचने के लिए 8 किलोमीटर का अतिरिक्त सफल करना पड़ रहा है। जबकि पूर्व में पंडोह बाजार पहुंचने के लिए ब्यास नदी पर बने लोहे के पुल को मात्र 5 मिनट का रास्ता तय कर पहुंचते थे। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। द्रंग और सदर विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और विभाग को चेताया कि यदि शीघ्र पंडाेह में ब्यास नदी पर पुल का निर्माण शुरू नहीं किया तो वे सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने से गुरेज नहीं करेंगे।
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पुल के लिए 21 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर भेज दी है। अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जैस ही पुल के लिए पैसा आएगा, काम शुरू कर दिया जाएगा। बाकी झूला पुल का कार्य मैकेनिकल विंग देखता है।
-विनोद शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग थलौट
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अभी तक नहीं मिल पाई मंजूरी, यहां बनाया गया अस्थायी झूला पुल भी हुआ खराब
ग्रामीण बेबस, आठ किमी घूमकर करना पड़ रहा सफर
रिपीट संशोधित खबर...
सौरभ कुमार
पंडोह (मंडी)। पिछली बरसात में आपदा के दौरान पंडोह में हुए नुकसान के जख्म अभी तक हरे हैं। द्रंग विधानसभा के इलाका बदार की नौ पंचायतों और पंडोह बाजार को जोड़ने वाला 100 साल पुराना पंडोह का लाल पुल पिछली बरसात में बह गया है। इसकी जगह बनने वाला नया पुल 11 माह से फाइलों में ही इधर-उधर घूम रहा है। हालत यह है कि अब यहां पर बनाया गया अस्थायी झूला पुल भी खराब है। ऐसे में ग्रामीण बेबस हैं और आठ किमी घूमकर पंडोह पहुंचने को मजबूर हैं।
हैरानी की बात यह है कि दो माह बाद फिर से बरसात शुरू होने वाली है, लेकिन पुराने जख्मों में सही तरीके से मरहम नहीं लग पाया है। 100 साल पुराना लाल पुल बहने के बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से लाखों रुपये खर्च कर इस स्थान पर एक अस्थायी झूला पुल लगाया था। इस पर बैठकर लोग आर पार हो रहे थे। मगर अब मात्र दो माह बाद ही यह झूला पुल भी खराब हो गया है।
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इलाका बदार निवासी टेकचंद, गोपाल ठाकुर, पंडोह बाजार के कारोबारी रोहित कुमार, केवल कृष्ण, रमन, अश्वनी पठानिया आदि ने बताया कि ब्यास नदी पर बीते वर्ष बाढ़ में बहे पुल का काम 11 माह बाद भी शुरू न होने से पंडोह व द्रंग क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। कहा कि मौजूदा समय में द्रंग क्षेत्र की 9 पंचायत के लोगों को पंडोह पहुंचने के लिए 8 किलोमीटर का अतिरिक्त सफल करना पड़ रहा है। जबकि पूर्व में पंडोह बाजार पहुंचने के लिए ब्यास नदी पर बने लोहे के पुल को मात्र 5 मिनट का रास्ता तय कर पहुंचते थे। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। द्रंग और सदर विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और विभाग को चेताया कि यदि शीघ्र पंडाेह में ब्यास नदी पर पुल का निर्माण शुरू नहीं किया तो वे सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने से गुरेज नहीं करेंगे।
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पुल के लिए 21 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर भेज दी है। अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जैस ही पुल के लिए पैसा आएगा, काम शुरू कर दिया जाएगा। बाकी झूला पुल का कार्य मैकेनिकल विंग देखता है।
-विनोद शर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग थलौट