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अगले साल मिलने का वादा कर देवी-देवता मूल स्थान लौटे
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इलाका उत्तरशाल के देवताओं का चौहटा बाजार में मिलन। आज देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना हो
- फोटो : Mandi
मंडी। समय : 7:45 बजे। स्थान : चौहटा। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि मेले के समापन में चौहटा जातर की तैयारी चल रही है। भूतनाथ मंदिर से लेकर डीसी चौक तक कुछ कारदार और देवलू अपने-अपने देवी-देवताओं के बैठने का स्थान तैयार कर रहे हैं तो कुछ देवी-देवताओं के साथ विराजमान हो चुके हैं। करीब आठ बजे सेरी मंच पर बड़ादेव कमरूनाग के दर्शन के लिए भीड़ जुटना शुरू हो गई।
बड़ादेव की पीहड़ू (चौकी) सजी है। साढ़े आठ बजे माधोराय मंदिर से राजदेवता की पालकी भूतनाथ की ओर निकली। डीसी अरिंदम चौधरी की मौजूदगी में राजदेवता माधोराय से माथा टेकने के बाद उन्होंने पंजीकृत देवी-देवताओं को नजराना और चादर भेंट करना शुरू की। बड़ादेव के इंतजार के लिए भक्तों की काफी संख्या सेरी में जुट गई। नौ बजे बड़ादेव सेरी की सीढ़ियों पर विराजे।
हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए आतुर दिखा। उन्होंने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए अपने मूल स्थान की ओर प्रस्थान किया। प्राचीन काल से बड़ादेव महाशिवरात्रि में आने के बाद आठ दिन तक टारना मंदिर में विराजते हैं। चौहटा जातर में देवी-देवताओं का दरबार सज चुका है। अंतिम जलेब में हिस्सा लेने वालों को छोड़कर देवलुओं ने देवी-देवताओं के साथ नाचते गाते हुए अगले साल मिलने का आश्वासन देकर अपने मूल स्थान की ओर रवानगी शुरू की।
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बड़ादेव की पीहड़ू (चौकी) सजी है। साढ़े आठ बजे माधोराय मंदिर से राजदेवता की पालकी भूतनाथ की ओर निकली। डीसी अरिंदम चौधरी की मौजूदगी में राजदेवता माधोराय से माथा टेकने के बाद उन्होंने पंजीकृत देवी-देवताओं को नजराना और चादर भेंट करना शुरू की। बड़ादेव के इंतजार के लिए भक्तों की काफी संख्या सेरी में जुट गई। नौ बजे बड़ादेव सेरी की सीढ़ियों पर विराजे।
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हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए आतुर दिखा। उन्होंने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए अपने मूल स्थान की ओर प्रस्थान किया। प्राचीन काल से बड़ादेव महाशिवरात्रि में आने के बाद आठ दिन तक टारना मंदिर में विराजते हैं। चौहटा जातर में देवी-देवताओं का दरबार सज चुका है। अंतिम जलेब में हिस्सा लेने वालों को छोड़कर देवलुओं ने देवी-देवताओं के साथ नाचते गाते हुए अगले साल मिलने का आश्वासन देकर अपने मूल स्थान की ओर रवानगी शुरू की।
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