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Mandi News: ठेकेदार बोले, सीएम साहब, भुगतान नहीं तो जहर ही दे दो
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मंडी में ठेकेदार जल्द भुगतान को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ रैली निकालते हुए। संवाद
- फोटो : संवाद
मंडी। धनराशि का भुगतान न होने पर ठेकेदार भड़क गए हैं। मंडी में वीरवार को ठेकेदारों ने रोष रैली निकाली और मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की। बाद में जिला प्रशासन के माध्यम से सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू को मांगों को लेकर ज्ञापन भेजा। ज्ञापन के माध्यम से 21 अप्रैल तक भुगतान करने की मांग उठाई। भुगतान न होने पर मजबूरन परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी।
धरने में शामिल एक महिला ठेकेदार बीना भवानी ने तो भुगतान दो या फिर जहर ही दे दो... की बात कह डाली। कहा कि उनके लिए अकेले परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। ठेकेदार यूनियन मंडी के प्रधान सुरेश और उपप्रधान संतोष ने बताया कि ठेकेदार वर्ग विकास कार्यों में सहयोग कर रहा है। विकास को गति प्रदान की जा रही है।
सभी वर्गों के लिए बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन ठेकेदार वर्ग से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसे सहन नहीं किया जाएगा। कहा कि उधार लेकर किए गए कार्य का भुगतान न होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। कर्जा लौटाना मुश्किल हो गया है। हर साल 31 मार्च तक 70 से 100 प्रतिशत भुगतान हो जाता है, लेकिन इस बार लंबित धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। अदायगी न होने से अब मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनके साथ जुड़े लोगों को भी परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार लंबित धनराशि का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करे अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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धरने में शामिल एक महिला ठेकेदार बीना भवानी ने तो भुगतान दो या फिर जहर ही दे दो... की बात कह डाली। कहा कि उनके लिए अकेले परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। ठेकेदार यूनियन मंडी के प्रधान सुरेश और उपप्रधान संतोष ने बताया कि ठेकेदार वर्ग विकास कार्यों में सहयोग कर रहा है। विकास को गति प्रदान की जा रही है।
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सभी वर्गों के लिए बजट का प्रावधान किया गया है, लेकिन ठेकेदार वर्ग से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इसे सहन नहीं किया जाएगा। कहा कि उधार लेकर किए गए कार्य का भुगतान न होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। कर्जा लौटाना मुश्किल हो गया है। हर साल 31 मार्च तक 70 से 100 प्रतिशत भुगतान हो जाता है, लेकिन इस बार लंबित धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। अदायगी न होने से अब मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनके साथ जुड़े लोगों को भी परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार लंबित धनराशि का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करे अन्यथा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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