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Mandi News: कोदरे से चाय, जलेबी और हलवा बनाना सिखाया
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धर्मपुर (मंडी)। मोटे अनाज से कई तरह की खाने की चीजें बनाई जा सकती हैं। इसमें कोदरे की चाय, जलेबी, हलवा, बिस्किट, मिठाइयां, पुलाव और सूप आदि शामिल है। इन खाद्य चीजों को बनाकर आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर और आत्मा परियोजना निदेशक मंडी के सहयोग से सजाओ पिपलू के आंबेडकर भवन में मोटे अनाज से विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाने के बारे में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी गई।
इस मौके पर इस कार्य में रूचि रखने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान समूहों के 70 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मोटे अनाज के लिए पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वाले नेक राम शर्मा ने विशेष तौर पर भाग लिया। इस प्रशिक्षण के बारे में भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह वर्ष मोटे अनाज के रूप में मनाया जा रहा है। यहां तक कि पिछले दिनों दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन में भी सभी डेलीगेट्स को मोटे अनाज से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजन खिलाए गए। ताकि इन अनाजों के महत्व को प्रचारित व प्रोत्साहित किया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान नेकराम ने बताया कि मोटा अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। इससे ब्लड प्रेशर और शूगर की बढ़ती बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि कोदरे, शौक और कौणी आदि मोटे अनाज की खेती करने में दूसरी फसलों के मुकाबले कम मेहनत करनी पड़ती है। यह अनाज लंबे अरसे तक सुरक्षित रहता है। वहीं, एसएमएस कृषि विभाग रमेश चंद ने बताया कि अगले सीजन में मोटे अनाज के क्लस्टर तैयार करने के लिए सभी क्षेत्रों में कलस्टर चयनित करके इनकी खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग किसानों को मदद करेगा।
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इस मौके पर इस कार्य में रूचि रखने वाली महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान समूहों के 70 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मोटे अनाज के लिए पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वाले नेक राम शर्मा ने विशेष तौर पर भाग लिया। इस प्रशिक्षण के बारे में भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह वर्ष मोटे अनाज के रूप में मनाया जा रहा है। यहां तक कि पिछले दिनों दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन में भी सभी डेलीगेट्स को मोटे अनाज से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजन खिलाए गए। ताकि इन अनाजों के महत्व को प्रचारित व प्रोत्साहित किया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान नेकराम ने बताया कि मोटा अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है। इससे ब्लड प्रेशर और शूगर की बढ़ती बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
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उन्होंने बताया कि कोदरे, शौक और कौणी आदि मोटे अनाज की खेती करने में दूसरी फसलों के मुकाबले कम मेहनत करनी पड़ती है। यह अनाज लंबे अरसे तक सुरक्षित रहता है। वहीं, एसएमएस कृषि विभाग रमेश चंद ने बताया कि अगले सीजन में मोटे अनाज के क्लस्टर तैयार करने के लिए सभी क्षेत्रों में कलस्टर चयनित करके इनकी खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग किसानों को मदद करेगा।
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