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Mandi News: सेहली में लीची के बगीचे में तैयार होगी सोयाबीन
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कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर ने किसानों के साथ 60 बीघे का बनाया क्लस्टर
छह क्विंटल दिया गया बीज, कर दी गई बुआई
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। उपमंडल की जड़ोल पंचायत के सेहली में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुंदरनगर लीची के बगीचे में सोयाबीन और सरसों की फसलें भी उगाएगा। स्थानीय किसानों के साथ 60 बीघे का एक क्लस्टर बनाया। इसमें सोयाबीन उगाई गई है। केवीके ने 6 क्विंटल सोयाबीन का बीज किसानों को दिया। इसकी बुआई कर दी गई है।
यह प्रयोग कामयाब हुआ तो सर्दियों में इसी बगीचे में सरसों और मटर की फसल उगाई जाएगी। प्रयोग के पीछे केवीके का तर्क है कि अगले पांच साल के बाद जब लीची की फसल शुरू हो जाएगी तब तक लीची के पेड़ों के आस पास की खाली जगह पर तेलीय फसलों से किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी। प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में लगाए शिवा प्रोजेक्ट के अन्य बगीचों में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा। इससे किसान को कृषि और बागवानी से आय कमाने का मौका मिलेगा। ज
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लीची के बगीचे में 60 बीघा क्लस्टर में सोयाबीन उगाई गई है। अक्तूबर तक यह फसल तैयार होगी। इसके बाद खरीफ फसल के तहत सर्दियों में मटर और सरसों को उगाया जाएगा। यह क्रम अगले पांच साल तक चलेगा ताकि लीची की फसल आने के दौरान इस जमीन का उपयोग कर किसान को अतिरिक्त आय मिलेगी।
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-डॉ. पंकज सूद, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर
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छह क्विंटल दिया गया बीज, कर दी गई बुआई
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। उपमंडल की जड़ोल पंचायत के सेहली में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुंदरनगर लीची के बगीचे में सोयाबीन और सरसों की फसलें भी उगाएगा। स्थानीय किसानों के साथ 60 बीघे का एक क्लस्टर बनाया। इसमें सोयाबीन उगाई गई है। केवीके ने 6 क्विंटल सोयाबीन का बीज किसानों को दिया। इसकी बुआई कर दी गई है।
यह प्रयोग कामयाब हुआ तो सर्दियों में इसी बगीचे में सरसों और मटर की फसल उगाई जाएगी। प्रयोग के पीछे केवीके का तर्क है कि अगले पांच साल के बाद जब लीची की फसल शुरू हो जाएगी तब तक लीची के पेड़ों के आस पास की खाली जगह पर तेलीय फसलों से किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी। प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में लगाए शिवा प्रोजेक्ट के अन्य बगीचों में भी यह मॉडल लागू किया जाएगा। इससे किसान को कृषि और बागवानी से आय कमाने का मौका मिलेगा। ज
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लीची के बगीचे में 60 बीघा क्लस्टर में सोयाबीन उगाई गई है। अक्तूबर तक यह फसल तैयार होगी। इसके बाद खरीफ फसल के तहत सर्दियों में मटर और सरसों को उगाया जाएगा। यह क्रम अगले पांच साल तक चलेगा ताकि लीची की फसल आने के दौरान इस जमीन का उपयोग कर किसान को अतिरिक्त आय मिलेगी।
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-डॉ. पंकज सूद, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर