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Mandi News: जेई से मारपीट के मामले में बुजुर्ग व्यक्ति को सजा खत्म
Wed, 27 Aug 2025 05:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 27 Aug 2025 05:15 AM IST
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मंडी। सत्र न्यायाधीश मंडी की अपीलीय अदालत ने जेई से मारपीट मामले में अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 63 वर्षीय यादविंद्र कुमार निवासी कुम्मी, बल्ह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई कारावास की सजा को खत्म कर केवल जुर्माने की सजा को बरकरार रखा।
14 जून 2019 को जलशक्ति विभाग उपमंडल बग्गी में कनिष्ठ अभियंता (जेई) से कार्यालय में मारपीट और धमकाने का मामला दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार पानी का कनेक्शन कटवाने की शिकायत लेकर आए यादविंद्र ने जेई को धक्का दिया, थप्पड़ मारा और पेन फेंका। अगले दिन उन्होंने जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस पर बल्ह थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया।
निचली अदालत ने मई 2025 में आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए दो-दो साल साधारण कारावास, छह माह कारावास सजा और कुल 7500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने फैसले के खिलाफ सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत में अपील दायर की।
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अपीलीय अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन आरोपी की उम्र, साफ आपराधिक रिकॉर्ड, पारिवारिक परिस्थितियां और लंबे मुकदमे को देखते हुए कारावास को कठोर माना। अदालत ने कहा कि जुर्माना पहले ही अदा किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को जेल भेजना न्यायसंगत नहीं होगा।
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14 जून 2019 को जलशक्ति विभाग उपमंडल बग्गी में कनिष्ठ अभियंता (जेई) से कार्यालय में मारपीट और धमकाने का मामला दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार पानी का कनेक्शन कटवाने की शिकायत लेकर आए यादविंद्र ने जेई को धक्का दिया, थप्पड़ मारा और पेन फेंका। अगले दिन उन्होंने जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस पर बल्ह थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया।
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निचली अदालत ने मई 2025 में आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए दो-दो साल साधारण कारावास, छह माह कारावास सजा और कुल 7500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने फैसले के खिलाफ सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत में अपील दायर की।
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अपीलीय अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन आरोपी की उम्र, साफ आपराधिक रिकॉर्ड, पारिवारिक परिस्थितियां और लंबे मुकदमे को देखते हुए कारावास को कठोर माना। अदालत ने कहा कि जुर्माना पहले ही अदा किया जा चुका है, इसलिए आरोपी को जेल भेजना न्यायसंगत नहीं होगा।