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Mandi News: तेरे माथे जो बिंदलू लाणा गोरिये गीत पर झूमे रिवालसर वासी
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छेश्चू मेला की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में हिमाचली नाइट का रंग
रमेश, कुलदीप और ट्विंकल की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। चार दिवसीय राज्य स्तरीय छेश्चू मेले की चौथी और अंतिम सांस्कृतिक संध्या शुक्रवार रात हिमाचली नाइट के रूप में उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुई। जिला कांगड़ा, कुल्लू और मंडी से आए लोक कलाकारों ने पहाड़ी, पंजाबी और हिंदी गीतों की प्रस्तुतियों से देर रात तक समां बांधे रखा। जैसे ही कलाकार मंच पर पहुंचे पंडाल तालियों और सीटियों की गूंज से भर उठा।
अंतिम संध्या में जिला कांगड़ा के लोक गायक सुनील मस्ती ने कांगड़ी अंदाज में कुछ सैलड़ियां लाई दे ढोला बंगड़ियां, तेरे माथे जो बिंदलू लाणा गोरिये, आया वो ललारिया और नाच मेरी घूंघरिए एसा ढोलकी री तारा जैसे गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। इसके अलावा माएं नी मेरिए शिमले दी राहें सहित हिंदी और पंजाबी गीतों पर भी दर्शक देर तक थिरकते रहे।
कुल्लू जिला से पहुंचे रमेश ठाकुर ने पहाड़ी रंग में सैंज म्हारा होटल, लाहुलिए घोर तेरा बंगलु, बांकी पड़ोसन, नाई सेंबा में तैरिंग, नामांगी नाचूंग और तुंदे पढूरा जैसे गीतों की प्रस्तुतियां दीं। उनकी लाहुली और पहाड़ी धुनों ने पंडाल में बैठे श्रोताओं को नृत्य करने के लिए प्रेरित किया। मंडी के प्रसिद्ध गायक कुलदीप ने पंजाबी गीत सोणिए मैं तेरे नाल दगा जो करां और सूफियाना अंदाज में तेरी दिवानी से माहौल को भावनात्मक रंग दिया। वहीं हिंदी गीत तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है, दर्दे दिल, दर्दे जिगर और केसरिया तेरा इश्क है दीवाना आदि प्रस्तुतियों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। इसके अतिरिक्त कुल्लू की कलाकारा ट्विंकल और अन्य स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। चार दिवसीय मेले की अंतिम रात लोक संस्कृति, संगीत और पारंपरिक नाटियों की छटा से सराबोर रही, जिससे रिवालसर की वादियां देर तक गीतों की गूंज से महकती रहीं।
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रमेश, कुलदीप और ट्विंकल की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। चार दिवसीय राज्य स्तरीय छेश्चू मेले की चौथी और अंतिम सांस्कृतिक संध्या शुक्रवार रात हिमाचली नाइट के रूप में उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुई। जिला कांगड़ा, कुल्लू और मंडी से आए लोक कलाकारों ने पहाड़ी, पंजाबी और हिंदी गीतों की प्रस्तुतियों से देर रात तक समां बांधे रखा। जैसे ही कलाकार मंच पर पहुंचे पंडाल तालियों और सीटियों की गूंज से भर उठा।
अंतिम संध्या में जिला कांगड़ा के लोक गायक सुनील मस्ती ने कांगड़ी अंदाज में कुछ सैलड़ियां लाई दे ढोला बंगड़ियां, तेरे माथे जो बिंदलू लाणा गोरिये, आया वो ललारिया और नाच मेरी घूंघरिए एसा ढोलकी री तारा जैसे गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर विवश कर दिया। इसके अलावा माएं नी मेरिए शिमले दी राहें सहित हिंदी और पंजाबी गीतों पर भी दर्शक देर तक थिरकते रहे।
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कुल्लू जिला से पहुंचे रमेश ठाकुर ने पहाड़ी रंग में सैंज म्हारा होटल, लाहुलिए घोर तेरा बंगलु, बांकी पड़ोसन, नाई सेंबा में तैरिंग, नामांगी नाचूंग और तुंदे पढूरा जैसे गीतों की प्रस्तुतियां दीं। उनकी लाहुली और पहाड़ी धुनों ने पंडाल में बैठे श्रोताओं को नृत्य करने के लिए प्रेरित किया। मंडी के प्रसिद्ध गायक कुलदीप ने पंजाबी गीत सोणिए मैं तेरे नाल दगा जो करां और सूफियाना अंदाज में तेरी दिवानी से माहौल को भावनात्मक रंग दिया। वहीं हिंदी गीत तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है, दर्दे दिल, दर्दे जिगर और केसरिया तेरा इश्क है दीवाना आदि प्रस्तुतियों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। इसके अतिरिक्त कुल्लू की कलाकारा ट्विंकल और अन्य स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया। चार दिवसीय मेले की अंतिम रात लोक संस्कृति, संगीत और पारंपरिक नाटियों की छटा से सराबोर रही, जिससे रिवालसर की वादियां देर तक गीतों की गूंज से महकती रहीं।
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