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Mandi News: आधुनिकता के युग में खत्म होने लगा रामलीला मंचन
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दशहरा से दो माह पहले ही शुरू हो जाती थी रिहर्सल
किरदारों के मंचन के लिए लगी रहती थी कलाकारों की भीड़
मोबाइल आने के बाद रामायण सहित गीता ज्ञान को भूली युवा पीढ़ी
हरदेव हरि
मंडी। आधुनिकता के युग में आजकल शहरों और गांवों में आयोजित होने वाले रामलीला मंचन का प्रचलन अब खत्म होने लगा है। दूरदराज में कहीं एक आध गांव में अब रामलीला मंचन देखने को मिलता है। हालांकि, इसकी तैयारी के लिए दशहरा उत्सव से दो माह पूर्व ही कलाकारों की रिहर्सल शुरू हो जाती थी। विभिन्न किरदारों के मंचन के लिए रिहर्सल स्थल पर कलाकारों की भारी भीड़ रहती थी। रामलीला देखने के लिए लोग सामूहिक रूप से रात को दूर-दूर से पहुंचते थे, लेकिन आजकल मोबाइल का प्रचलन बढ़ने से युवा पीढ़ी रामायण, गीता ज्ञान और महापुरुषों को भूलती जा रही है। मंडी की बात करें तो सेरी मंच, रवि कला केंद्र सुहड़ा वार्ड, पंडोह, जोगिंद्रनगर, धर्मपुर, सरकाघाट, सुंदरनगर, करसोग सहित अन्य क्षेत्रों में वर्ष 2000 तक रामलीला मंचन होता था, लेकिन आज मोबाइल फोन हाथ में आने से लोग इस तरह के आयोजनों में रुचि नहीं ले पा रहे।
सेरी मंच पर रामलीला मंचन संपन्न होने के बाद सुहड़ा वार्ड में नव ज्योति कलामंच के कलाकारों ने वर्ष 2015 तक इस क्रम को जारी रखा, लेकिन आज यह आयोजन खत्म हो रहे हैं। अब केवल कोटली, मौवीसेरी गोहर, सरकाघाट जोगिंद्रनगर सहित अन्य दूरदराज के गांवों में मंचन हो रहा है।
क्या कहते हैं कलाकार
रवि कला केंद्र सुहड़ा की ओर से 70 के दशक में रामलीला शुरू की गई थी। उसके बाद नव ज्योति कलामंच के कलाकारों ने यह बीड़ा उठाया था। मंच ने लगातार 28 वर्ष तक रामलीला का मंचन किया। ताड़का वध, सीता स्वयंबर, राम वनवास आदि दृश्यों को देखने के लिए लोग विशेष रूप से पहुंचते थे। -जय कुमार कलाकार
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सेरी मंच पर आयोजित रामलीला मंचन में हास्य कलाकारों की ओर से अपने व्यंग्यात्मक अभिनय से दर्शकों को लोटपोट किया जाता था। मंडी शहर के हास्य कलाकार स्व. विनय कुमार टिड्डू, भोला राम, मस्तराम, रिंपी सहित अन्य कलाकारों को लोग आज भी याद करते हैं। लोगों को लोटपोट करने के लिए सेरी मंच पर हास्य कलाकार अपने अभिनय से आधी रात को ठंडे पानी से मंच पर स्नान कर लेते थे।-- हेमराज राणा, कलाकार
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किरदारों के मंचन के लिए लगी रहती थी कलाकारों की भीड़
मोबाइल आने के बाद रामायण सहित गीता ज्ञान को भूली युवा पीढ़ी
हरदेव हरि
मंडी। आधुनिकता के युग में आजकल शहरों और गांवों में आयोजित होने वाले रामलीला मंचन का प्रचलन अब खत्म होने लगा है। दूरदराज में कहीं एक आध गांव में अब रामलीला मंचन देखने को मिलता है। हालांकि, इसकी तैयारी के लिए दशहरा उत्सव से दो माह पूर्व ही कलाकारों की रिहर्सल शुरू हो जाती थी। विभिन्न किरदारों के मंचन के लिए रिहर्सल स्थल पर कलाकारों की भारी भीड़ रहती थी। रामलीला देखने के लिए लोग सामूहिक रूप से रात को दूर-दूर से पहुंचते थे, लेकिन आजकल मोबाइल का प्रचलन बढ़ने से युवा पीढ़ी रामायण, गीता ज्ञान और महापुरुषों को भूलती जा रही है। मंडी की बात करें तो सेरी मंच, रवि कला केंद्र सुहड़ा वार्ड, पंडोह, जोगिंद्रनगर, धर्मपुर, सरकाघाट, सुंदरनगर, करसोग सहित अन्य क्षेत्रों में वर्ष 2000 तक रामलीला मंचन होता था, लेकिन आज मोबाइल फोन हाथ में आने से लोग इस तरह के आयोजनों में रुचि नहीं ले पा रहे।
सेरी मंच पर रामलीला मंचन संपन्न होने के बाद सुहड़ा वार्ड में नव ज्योति कलामंच के कलाकारों ने वर्ष 2015 तक इस क्रम को जारी रखा, लेकिन आज यह आयोजन खत्म हो रहे हैं। अब केवल कोटली, मौवीसेरी गोहर, सरकाघाट जोगिंद्रनगर सहित अन्य दूरदराज के गांवों में मंचन हो रहा है।
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क्या कहते हैं कलाकार
रवि कला केंद्र सुहड़ा की ओर से 70 के दशक में रामलीला शुरू की गई थी। उसके बाद नव ज्योति कलामंच के कलाकारों ने यह बीड़ा उठाया था। मंच ने लगातार 28 वर्ष तक रामलीला का मंचन किया। ताड़का वध, सीता स्वयंबर, राम वनवास आदि दृश्यों को देखने के लिए लोग विशेष रूप से पहुंचते थे। -जय कुमार कलाकार
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सेरी मंच पर आयोजित रामलीला मंचन में हास्य कलाकारों की ओर से अपने व्यंग्यात्मक अभिनय से दर्शकों को लोटपोट किया जाता था। मंडी शहर के हास्य कलाकार स्व. विनय कुमार टिड्डू, भोला राम, मस्तराम, रिंपी सहित अन्य कलाकारों को लोग आज भी याद करते हैं। लोगों को लोटपोट करने के लिए सेरी मंच पर हास्य कलाकार अपने अभिनय से आधी रात को ठंडे पानी से मंच पर स्नान कर लेते थे।