{"_id":"68b34387c50fd76d2c0e1176","slug":"order-to-acquit-the-couple-in-road-construction-dispute-case-mandi-news-c-90-1-ssml1045-167824-2025-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: सड़क निर्माण विवाद मामले में दंपती को बरी करने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: सड़क निर्माण विवाद मामले में दंपती को बरी करने के आदेश
विज्ञापन
मंडी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदरनगर की अदालत ने सड़क निर्माण विवाद मामले में बाबू राम और उनकी पत्नी सावित्री देवी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अभियोजन पक्ष के तथ्यों के अनुसार 29 मई 2015 को सुंदरनगर उपमंडल के गांव कयाण से अहण सड़क की मरम्मत का कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से शुरू किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और पथराव किया था। इसी आधार पर उनके विरुद्ध पुलिस थाना सुंदरनगर में मामला दर्ज हुआ था। सभी प्रकार की औपचारिकताओं के बाद चालान अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन एसडीएम समेत दस गवाहों को अदालत में पेश किया। हालांकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि संबंधित भूमि अभियुक्तों की निजी मिलकियत है और बिना अधिग्रहण व मुआवजा दिए विभाग जबरन सड़क निर्माण कर रहा था। अदालत ने गवाहों के बयान, तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 504 व 34 के आरोपों से मुक्त करार देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के तथ्यों के अनुसार 29 मई 2015 को सुंदरनगर उपमंडल के गांव कयाण से अहण सड़क की मरम्मत का कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से शुरू किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और पथराव किया था। इसी आधार पर उनके विरुद्ध पुलिस थाना सुंदरनगर में मामला दर्ज हुआ था। सभी प्रकार की औपचारिकताओं के बाद चालान अदालत में पेश किया गया।
विज्ञापन
पुलिस ने इस मामले में तत्कालीन एसडीएम समेत दस गवाहों को अदालत में पेश किया। हालांकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि संबंधित भूमि अभियुक्तों की निजी मिलकियत है और बिना अधिग्रहण व मुआवजा दिए विभाग जबरन सड़क निर्माण कर रहा था। अदालत ने गवाहों के बयान, तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 504 व 34 के आरोपों से मुक्त करार देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया। संवाद
विज्ञापन