{"_id":"690251e33fbcd203bf0fafe6","slug":"one-year-imprisonment-to-the-accused-in-the-cheque-bounce-case-mandi-news-c-90-1-ssml1045-174424-2025-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की सजा
Thu, 30 Oct 2025 06:11 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 30 Oct 2025 06:11 AM IST
विज्ञापन
मंडी। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) मंडी की अदालत ने एक चेक बाउंस मामले में आरोपी चमन लाल निवासी मेरामसीत तहसील बल्ह को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास सजा का फैसला सुनाया। अदालत ने दो लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया।
यह मामला जनहित थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, नेरचौक द्वारा दायर किया गया था। सोसाइटी ने अदालत में शिकायत दी थी कि आरोपी ने उनसे 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। इस ऋण की अदायगी के लिए चमन लाल ने 11 अप्रैल 2019 को 1,01,257 रुपये का चेक जारी किया।
जब यह चेक बैंक में लगाया गया तो 18 अप्रैल 2019 को अपर्याप्त धनराशि के कारण अस्वीकृत हो गया। इसके बाद सोसाइटी ने 30 अप्रैल 2019 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
विज्ञापन
मामला 13 जून 2019 को अदालत में दायर हुआ था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया कि उसने ऋण लिया था लेकिन लॉकडाउन के कारण राशि चुकता नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा अपने हस्ताक्षर स्वीकार करने से यह सिद्ध हो गया कि चेक ऋण अदायगी के लिए जारी किया गया था। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
सजा की अवधि पर सुनवाई के दौरान दोषी की ओर से यह दलील दी गई कि अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। यह भी दलील दी गई कि दोषी को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दिया जाए और उसके प्रति नरम रुख अपनाया जाए।
दोषी और शिकायतकर्ता के वकील द्वारा दिए गए तर्कों को सुनने के बाद दोषी को एक वर्ष का साधारण कारावास और सोसाइटी को दो लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए। मुआवजे में 1,01,257 रुपये चेक राशि और 98,743 ब्याज व मुकदमे का खर्च शामिल है।
विज्ञापन
यह मामला जनहित थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, नेरचौक द्वारा दायर किया गया था। सोसाइटी ने अदालत में शिकायत दी थी कि आरोपी ने उनसे 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। इस ऋण की अदायगी के लिए चमन लाल ने 11 अप्रैल 2019 को 1,01,257 रुपये का चेक जारी किया।
विज्ञापन
जब यह चेक बैंक में लगाया गया तो 18 अप्रैल 2019 को अपर्याप्त धनराशि के कारण अस्वीकृत हो गया। इसके बाद सोसाइटी ने 30 अप्रैल 2019 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
विज्ञापन
मामला 13 जून 2019 को अदालत में दायर हुआ था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया कि उसने ऋण लिया था लेकिन लॉकडाउन के कारण राशि चुकता नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा अपने हस्ताक्षर स्वीकार करने से यह सिद्ध हो गया कि चेक ऋण अदायगी के लिए जारी किया गया था। सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
सजा की अवधि पर सुनवाई के दौरान दोषी की ओर से यह दलील दी गई कि अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। यह भी दलील दी गई कि दोषी को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम का लाभ दिया जाए और उसके प्रति नरम रुख अपनाया जाए।
दोषी और शिकायतकर्ता के वकील द्वारा दिए गए तर्कों को सुनने के बाद दोषी को एक वर्ष का साधारण कारावास और सोसाइटी को दो लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए। मुआवजे में 1,01,257 रुपये चेक राशि और 98,743 ब्याज व मुकदमे का खर्च शामिल है।