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Mandi News: नव संवत के दिन पुजारी बोधराज बनेंगे बड़ा देव कमरूनाग के गूर
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बोधराज छह दिन बाद पहली बार कमराह मंदिर में करेंगे बड़ा देव का पारंपरिक शृंगार
नवरात्र से खुलेंगे कमरूनाग मंदिर के कपाट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। मंडी महाशिवरात्रि मेले से लौटने के ठीक छह दिन बाद नव संवत और प्रथम नवरात्र की पूर्व संध्या पर कमराह में पुजारी बोधराज विधिवत रूप से बड़ा देव कमरूनाग के गूर बन जाएंगे। 19 मार्च को नव संवत (चतरांस) के अवसर पर गूर बोधराज पहली बार कमराह मंदिर में बड़ा देव कमरुनाग को पारंपरिक कल्यां-कल्यां लगाएंगे और उनकी प्राचीन मूर्ति का शृंगार करेंगे।
परंपरा के अनुसार देसी घी, चावल और पठावा के मिश्रण से बड़ा देव की प्राचीन मूर्ति का शृंगार किया जाएगा। इस विशेष अनुष्ठान को पुजारी बोधराज बतौर गूर पहली बार संपन्न करेंगे। इससे पहले 18 मार्च की शाम को बड़ा देव कमरूनाग के देवलू पुजारी बोधराज को पट्टड्डे पर बिठाएंगे और देवता की मालाएं पहनाकर उन्हें विधिवत रूप से गूर घोषित करेंगे। इस दौरान बोधराज पहली बार देव परंपरा के अनुसार खेलेंगे।
पिछले दिनों क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी न होने तथा लंबे सूखे के चलते लोगों ने देव कमरूनाग की गूर परंपरा पूर्व गूर देवी सिंह से लेकर पुजारी बोधराज को सौंप दी थी। इसके बाद बड़ा देव कमरूनाग मंडी शिवरात्रि मेले के लिए रवाना हो गए थे। अब देवता के वापस लौटने के साथ ही पुजारी बोधराज को गूर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उधर, नव संवत के दिन बड़ा देव को कल्यां लगाने के बाद कमरूनाग मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। देवता के कटवाल चिंतराम ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है।
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नवरात्र से खुलेंगे कमरूनाग मंदिर के कपाट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। मंडी महाशिवरात्रि मेले से लौटने के ठीक छह दिन बाद नव संवत और प्रथम नवरात्र की पूर्व संध्या पर कमराह में पुजारी बोधराज विधिवत रूप से बड़ा देव कमरूनाग के गूर बन जाएंगे। 19 मार्च को नव संवत (चतरांस) के अवसर पर गूर बोधराज पहली बार कमराह मंदिर में बड़ा देव कमरुनाग को पारंपरिक कल्यां-कल्यां लगाएंगे और उनकी प्राचीन मूर्ति का शृंगार करेंगे।
परंपरा के अनुसार देसी घी, चावल और पठावा के मिश्रण से बड़ा देव की प्राचीन मूर्ति का शृंगार किया जाएगा। इस विशेष अनुष्ठान को पुजारी बोधराज बतौर गूर पहली बार संपन्न करेंगे। इससे पहले 18 मार्च की शाम को बड़ा देव कमरूनाग के देवलू पुजारी बोधराज को पट्टड्डे पर बिठाएंगे और देवता की मालाएं पहनाकर उन्हें विधिवत रूप से गूर घोषित करेंगे। इस दौरान बोधराज पहली बार देव परंपरा के अनुसार खेलेंगे।
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पिछले दिनों क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी न होने तथा लंबे सूखे के चलते लोगों ने देव कमरूनाग की गूर परंपरा पूर्व गूर देवी सिंह से लेकर पुजारी बोधराज को सौंप दी थी। इसके बाद बड़ा देव कमरूनाग मंडी शिवरात्रि मेले के लिए रवाना हो गए थे। अब देवता के वापस लौटने के साथ ही पुजारी बोधराज को गूर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उधर, नव संवत के दिन बड़ा देव को कल्यां लगाने के बाद कमरूनाग मंदिर के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। देवता के कटवाल चिंतराम ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है।
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