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Mandi News: बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के लिए हाइड्रोलिक लैडर नहीं
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सीढ़ियों-रस्सियों के सहारे रेस्क्यू की मजबूरी
जिले के 10 से अधिक अग्निशमन केंद्रों में जवानों की कमी
बड़ी आग की घटनाओं से निपटना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जिले में ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में दमकल विभाग की तैयारियों की पोल खुल सकती है। पांच से सात मंजिला भवनों तक पहुंचने के लिए विभाग के पास हाइड्रोलिक लैडर युक्त प्लेटफार्म वाहन नहीं है। ऐसे में आग बुझाने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जवानों को सीढ़ियों और रस्सियों का सहारा लेना पड़ता है। इमारत की ऊंचाई बढ़ने के साथ यह चुनौती और गंभीर हो जाती है तथा जवानों को जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू करना पड़ सकता है। जिले में लगातार बहुमंजिला भवनों का निर्माण हो रहा है। जोगिंद्रनगर और सुंदरनगर जैसे शहरों में अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों के कई भवन बहुमंजिला हैं। ऐसे में ऊपरी मंजिल पर आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों की सामान्य सीढ़ियों की पहुंच सीमित हो जाती है। आग और धुएं के बीच फंसे लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकालना भी चुनौती बन सकता है।
मंडी अग्निशमन केंद्र में चार फायर टेंडर, दो क्यूआरवी वाहन और संकरी गलियों में पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल उपलब्ध हैं। इसके बावजूद ऊंची इमारतों में सीधे रेस्क्यू के लिए इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोलिक प्लेटफार्म वाहन उपलब्ध नहीं है। जिले के रिवालसर, गोहर और थुनाग सब स्टेशन तथा सरकाघाट, निहरी और करसोग दमकल चौकियों में भी संसाधनों के साथ कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
बद्दी और नालागढ़ में हाल में हुई बड़ी आग की घटनाओं ने आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। मंडी जैसे पहाड़ी जिले में ऊंची इमारतों तक पहुंचने में लगने वाला अतिरिक्त समय आग की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
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जिले में अग्निशमन सुविधाओं को जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा रहा है। हाइड्रोलिक लैडर युक्त प्लेटफार्म वाहन की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। आग की घटनाओं से निपटने के लिए मौजूदा स्तर पर सभी जरूरी प्रबंध किए गए हैं। -पुनीत रघु, जिला कमांडेंट, दमकल विभाग मंडी
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जिले के 10 से अधिक अग्निशमन केंद्रों में जवानों की कमी
बड़ी आग की घटनाओं से निपटना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जिले में ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में दमकल विभाग की तैयारियों की पोल खुल सकती है। पांच से सात मंजिला भवनों तक पहुंचने के लिए विभाग के पास हाइड्रोलिक लैडर युक्त प्लेटफार्म वाहन नहीं है। ऐसे में आग बुझाने और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जवानों को सीढ़ियों और रस्सियों का सहारा लेना पड़ता है। इमारत की ऊंचाई बढ़ने के साथ यह चुनौती और गंभीर हो जाती है तथा जवानों को जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू करना पड़ सकता है। जिले में लगातार बहुमंजिला भवनों का निर्माण हो रहा है। जोगिंद्रनगर और सुंदरनगर जैसे शहरों में अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों के कई भवन बहुमंजिला हैं। ऐसे में ऊपरी मंजिल पर आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों की सामान्य सीढ़ियों की पहुंच सीमित हो जाती है। आग और धुएं के बीच फंसे लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकालना भी चुनौती बन सकता है।
मंडी अग्निशमन केंद्र में चार फायर टेंडर, दो क्यूआरवी वाहन और संकरी गलियों में पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल उपलब्ध हैं। इसके बावजूद ऊंची इमारतों में सीधे रेस्क्यू के लिए इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोलिक प्लेटफार्म वाहन उपलब्ध नहीं है। जिले के रिवालसर, गोहर और थुनाग सब स्टेशन तथा सरकाघाट, निहरी और करसोग दमकल चौकियों में भी संसाधनों के साथ कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
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बद्दी और नालागढ़ में हाल में हुई बड़ी आग की घटनाओं ने आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। मंडी जैसे पहाड़ी जिले में ऊंची इमारतों तक पहुंचने में लगने वाला अतिरिक्त समय आग की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
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जिले में अग्निशमन सुविधाओं को जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा रहा है। हाइड्रोलिक लैडर युक्त प्लेटफार्म वाहन की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। आग की घटनाओं से निपटने के लिए मौजूदा स्तर पर सभी जरूरी प्रबंध किए गए हैं। -पुनीत रघु, जिला कमांडेंट, दमकल विभाग मंडी