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स्वर्णिम विजय दिवस पर याद किए 1971 युद्ध के शहीद
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मंडी के इंदिरा मार्केट में स्थित शहीदी स्मारक में 1971 भारत-पाक युद्ध का स्वर्णिम विजय दिवस पर शहीद?
- फोटो : Mandi
मंडी। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग, पूर्व सैनिक लीग ने 1971 में शहीद हुए सैनिकों की याद में इंदिरा मार्केट में स्थापित शहीद स्मारक में स्वर्णिम विजय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे।
सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने दो मिनट का मौन रख कर शहीदों को याद किया। पुलिस टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी देकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान जिलेभर से पूर्व सैनिक मौजूद रहे। सीने पर सेना मेडल सजाए सभी पूर्व सैनिकों ने एक दूसरे से मिल कर पुरानी यादों को ताजा किया।
इस दौरान डिफेंस वुमन वेलफेयर एसोसिएशन की महिलाओं ने देशभक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में 1978 में जैकरिफ से हवलदार सेवानिवृत्त हुए रिवालसर से आए हवलदार पूर्ण चंद ने बताया कि 15 वर्ष तक देश सेवा की है।
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सैनिकों की याद में आयोजित होने वाले कार्यक्रम सैनिकों के लिए मेले की तरह होते हैं। जहां सभी वर्षों बाद एक दूसरे से मिल पाते हैं और पुरानी यादों को ताजा करते हैं। मुख्यातिथि ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर ने कहा कि 16 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान को आजाद करवाया गया था, जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में देश के 3845 वीर सैनिकों ने शहादत पाई थी। इसमें प्रदेश के 190 सैनिक शहीद हुए थे। इस दौरान वीर नारी चिंता देवी, कृष्णा देवी तथा कई पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया।
1978 में नायक पद से सेवानिवृत्त हुए दूसरा खाबू रिवालसर के रूप लाल ने बताया कि वह डोगरा रेजीमेंट में थे। आधुनिक युग में सैनिक समारोहों में बहुत बदलाव आया है। पूर्व सैनिक लीग के महासचिव कैप्टन हेतराम शर्मा ने बताया कि 1971 में भारत-पाक युद्ध को 16 दिसंबर को 50 साल पूरे हो गए हैं। इसे अब स्वर्णिम विजय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। कर्नल एमके मंडयाल ने भी अपने अनुभवों और युद्ध की यादों को साझा किया। कर्नल केके मल्होत्रा और जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने भी अपने विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर कर्नल भीम सिंह, कर्नल हरीश वैद्य, कर्नल रविंद्र सिंह, कर्नल वीरेंद्र तपवाल, कैप्टन जैसी सैनी, उत्तम सिंह, भीम सिंह, वीर सिंह, मेघ सिंह, एसएम टेक सिंह, हवलदार केहर सिंह, डिफेंस वुमन वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष आशा ठाकुर, सरिता, डिंपल, नीतू, मीनू, धर्मा, जस्सो, अंजना, कुसुम, शांता, मंजू, द्रोपदी, हितेंद्रा, ऊषा आदि मौजूद रहे।
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सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने दो मिनट का मौन रख कर शहीदों को याद किया। पुलिस टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी देकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान जिलेभर से पूर्व सैनिक मौजूद रहे। सीने पर सेना मेडल सजाए सभी पूर्व सैनिकों ने एक दूसरे से मिल कर पुरानी यादों को ताजा किया।
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इस दौरान डिफेंस वुमन वेलफेयर एसोसिएशन की महिलाओं ने देशभक्ति कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में 1978 में जैकरिफ से हवलदार सेवानिवृत्त हुए रिवालसर से आए हवलदार पूर्ण चंद ने बताया कि 15 वर्ष तक देश सेवा की है।
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सैनिकों की याद में आयोजित होने वाले कार्यक्रम सैनिकों के लिए मेले की तरह होते हैं। जहां सभी वर्षों बाद एक दूसरे से मिल पाते हैं और पुरानी यादों को ताजा करते हैं। मुख्यातिथि ब्रिगेडियर कुशाल ठाकुर ने कहा कि 16 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान को आजाद करवाया गया था, जो आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में देश के 3845 वीर सैनिकों ने शहादत पाई थी। इसमें प्रदेश के 190 सैनिक शहीद हुए थे। इस दौरान वीर नारी चिंता देवी, कृष्णा देवी तथा कई पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया।
1978 में नायक पद से सेवानिवृत्त हुए दूसरा खाबू रिवालसर के रूप लाल ने बताया कि वह डोगरा रेजीमेंट में थे। आधुनिक युग में सैनिक समारोहों में बहुत बदलाव आया है। पूर्व सैनिक लीग के महासचिव कैप्टन हेतराम शर्मा ने बताया कि 1971 में भारत-पाक युद्ध को 16 दिसंबर को 50 साल पूरे हो गए हैं। इसे अब स्वर्णिम विजय दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। कर्नल एमके मंडयाल ने भी अपने अनुभवों और युद्ध की यादों को साझा किया। कर्नल केके मल्होत्रा और जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने भी अपने विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर कर्नल भीम सिंह, कर्नल हरीश वैद्य, कर्नल रविंद्र सिंह, कर्नल वीरेंद्र तपवाल, कैप्टन जैसी सैनी, उत्तम सिंह, भीम सिंह, वीर सिंह, मेघ सिंह, एसएम टेक सिंह, हवलदार केहर सिंह, डिफेंस वुमन वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष आशा ठाकुर, सरिता, डिंपल, नीतू, मीनू, धर्मा, जस्सो, अंजना, कुसुम, शांता, मंजू, द्रोपदी, हितेंद्रा, ऊषा आदि मौजूद रहे।