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Mandi News: बालू गांव में कई मकान क्षतिग्रस्त, प्रशासन नदारद
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नगवाईं (मंडी)। स्नोर घाटी के बालू गांव में भूस्खलन से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गांव में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि दर्जनों परिवारों ने अपने घर खाली कर अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ली है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के कई दिन बीतने के बावजूद प्रशासन की कोई मदद नहीं पहुंची है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग की है। स्थानीय समाज सेविका भानु कपूर ने भूस्खलन के पीछे लोक निर्माण विभाग की ओर से की गई सड़क चौड़ीकरण की कटिंग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि बिना उचित सुरक्षा इंतजाम की गई कटिंग के कारण यह तबाही हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार बालू क्षेत्र के कई अन्य गांवों में भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। गांव की मुख्य सड़क बंद होने के कारण लोगों को 14 किलोमीटर दूर नगवाईं पैदल पहुंचना पड़ रहा है। जरूरी सामान और राशन को लोग पीठ पर ढोकर ला रहे हैं। क्षेत्र में इस समय सेब की तुड़ाई का समय है, लेकिन सड़क टूट जाने से किसान अपनी फसल को बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इससे सेब की फसल बगीचों में ही खराब हो रही है।
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ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से अपील की है कि बालू गांव और आस-पास के प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत दल भेजे जाएं। सड़क की मरम्मत करवाई जाए और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों को मुआवजा और अस्थायी आवास की व्यवस्था दी जाए।
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ग्रामीणों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग की है। स्थानीय समाज सेविका भानु कपूर ने भूस्खलन के पीछे लोक निर्माण विभाग की ओर से की गई सड़क चौड़ीकरण की कटिंग को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि बिना उचित सुरक्षा इंतजाम की गई कटिंग के कारण यह तबाही हुई है।
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ग्रामीणों के अनुसार बालू क्षेत्र के कई अन्य गांवों में भी भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। गांव की मुख्य सड़क बंद होने के कारण लोगों को 14 किलोमीटर दूर नगवाईं पैदल पहुंचना पड़ रहा है। जरूरी सामान और राशन को लोग पीठ पर ढोकर ला रहे हैं। क्षेत्र में इस समय सेब की तुड़ाई का समय है, लेकिन सड़क टूट जाने से किसान अपनी फसल को बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इससे सेब की फसल बगीचों में ही खराब हो रही है।
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ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से अपील की है कि बालू गांव और आस-पास के प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत दल भेजे जाएं। सड़क की मरम्मत करवाई जाए और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों को मुआवजा और अस्थायी आवास की व्यवस्था दी जाए।
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