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महिलाओं को समान अधिकार मिलें तो रुक सकती है हिंसा : डॉ. रमेश

Tue, 30 Aug 2022 11:00 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Aug 2022 11:00 PM IST
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सुंदरनगर स्थित स्वामी श्री विवेकानंद वेटरनरी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में मंगलवार को अमर उजाला के ? - फोटो : Mandi
सुंदरनगर (मंडी)। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार मिलें तभी महिला हिंसा रुक सकती है। यह बात मंगलवार को स्वामी विवेकानंद वेटरनेरी फार्मासिस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट सुंदरनगर में आयोजित ‘अपराजिता-100 मिलियन ऑफ स्माइल्स’ कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. रमेश कुमार ने कही।
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संस्थान के प्रबंध निदेशक ओम प्रकाश नायक एवं चेयरमैन सुरेंद्र पाल भारद्वाज विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य करने और लोगों को इसको लेकर जागरूक करने के लिए संस्थान की छात्राओं, छात्रों, अध्यापक वर्ग एवं स्टाफ को शपथ दिलाई। डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि महिलाओं को भी अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।
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महिला मां भी है, बहन भी है और पत्नी भी है। अगर वह बचपन से अपने बच्चों को महिलाओं का सम्मान करने को लेकर शिक्षित करेंगी तो समाज में अपने आप ही महिलाओं पर अत्याचार खत्म होंगे। ओम प्रकाश नायक ने कहा कि देश में बेटियों पर बढ़ते अत्याचारों को रोकने के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। सुरेंद्र पाल भारद्वाज ने छात्राओं में सशक्तीकरण को लेकर जोश भरा और कहा अब समय आ गया है कि विधानसभा और संसद में भी महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी हो।
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अपराजिता कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के प्राध्यापक डॉ. एलआर ठाकुर, डॉ. दीपिका ठाकुर, डॉ. वैशाली ठाकुर, डॉ. तरुण ठाकुर, मनीष कुमार, रजत कुमार, कंचन, रीता देवी, तारा देवी, जयराम, राजू और रवि कुमार का सराहनीय योगदान रहा।
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जागरूक होने की जरूरत
देश में आज भी महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार नहीं मिल सके हैं। आए दिन दहेज हत्या, महिला उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामले सामने आना इसका उदाहरण है। नारियों को अपने अधिकारों के प्रति और अधिक जागरूक होने की जरूरत है।
-सपना, छात्रा
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खुद को कमतर न समझें
नारी सशक्तीकरण की मुहिम सराहनीय है। कार्यक्रम से सीख मिली है कि अपने को कमतर नहीं समझना है। अपराजिता कार्यक्रम से जीवन में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली है। महिलाओं को अपने अधिकार पहचानने होंगे।
-ज्योति, छात्रा
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आत्मविश्वास जरूरी
अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने का अधिकार देना ही महिला को सशक्त बना सकता है। इसके अलावा स्वयं पर आत्मविश्वास भी जरूरी है। खुद पर विश्वास है तो महिला को कोई भी अपराजिता होने से नहीं रोक पाएगा।

-साक्षी, छात्रा
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चुप्पी साधना गलत
महिलाएं समाज में बदनामी के डर से शोषण होने पर चुप्पी साध लेती हैं, जो सही नहीं है। शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के लिए आगे आना ही होगा। अपराध सहने वाला भी अपराध करने वाले के बराबर दोषी होता है। इसलिए संकोच छोड़ अपराध के विरुद्ध आवाज उठाएं।
-मुस्कान, छात्रा
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