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एम फॉर्म न देने से अटक रहा भुगतान

Sun, 09 Jan 2022 10:24 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 10:24 PM IST
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सुंदरनगर के धनोटू में सुकेत टिपर ऑपरेटर एसोसिएशन की बैठक में उपस्थित सदस्य। - फोटो : Mandi
सुंदरनगर (मंडी)। सुकेत टिपर ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक रविवार को धनोटू ट्रक यूनियन परिसर में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता यूनियन के वरिष्ठ सदस्य राजेंद्र भंडारी ने की। बैठक में क्रशर संचालकों पर रेत और बजरी को बिना एम फॉर्म लेने का दबाव बनाने का आरोप लगाया। टिपर ऑपरेटरों ने कहा कि रेत और बजरी की खरीद की राशि का भुगतान करने पर भी उन्हें एम फॉर्म नहीं दिए जा रहे हैं। इसके कारण सरकारी विभागों को वे माल की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। पुलिस भी बिना एम फॉर्म के सड़क पर वाहन चलाने पर मोटी जुर्माना राशि लगा रही है। इसके कारण टिपर संचालकों की कमर ही टूट कर रह गई है।
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टिपर ऑपरेटर महेश कुमार, बिंदर कुमार, सुंदर लाल, वरुण ठाकुर, मुनी लाल, महेंद्र राणा, कृष्ण चंद, अमर सिंह, दिनेश कुमार, पंकज कुमार और अजय कुमार का कहना था कि बिना एम फॉर्म वाहनों के चालान हो रहे है, वहीं ठेकेदारों को सरकारी विभाग से भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
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पंचायतों को दिए गए माल के बिल भी पास नहीं हो पा रहे हैं। ऑपरेटरों ने सरकार से मांग उठाई है कि वह सुनिश्चित करे कि हर क्रशर मालिक रेत-बजरी की खरीद पर एम फॉर्म जारी करे, अन्यथा सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। ऑपरेटरों ने खनन विभाग पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है जो प्रदेश सरकार को एम फार्म से मिलने वाले राजस्व के हो रहे नुकसान पर भी चुप्पी साधे बैठा है। इस मौके पर प्रस्ताव पारित कर यह भी मांग की गई कि सरकार खड्डों में वैध खनन के पट्टों को बढ़ाए और जिन लोगों की मिलकियत में रेत-बजरी के भंडार हैं, को भी इसे बेचने के लिए लाइसेंस दें। रोष जताया कि सरकार ने कोरोना काल के दौरान प्रभावित हुए बस और टैक्सी ऑपरेटरों के तो टोकन और गुड्स टैक्स माफ कर दिए हैं लेकिन इसमें एक बड़ा वर्ग जिसमें ट्रक और टिपर ऑपरेटर शामिल हैं, को कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने इस वर्ग के भी टैक्स माफ करने की मांग की है।
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