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मारपीट के दोषी की अपीलीय अदालत ने बरकरार रखी सजा
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मंडी। अपीलीय अदालत ने मारपीट के आरोपी की अपील को निरस्त कर अधीनस्थ न्यायालय की ओर से सुनाई सजा को बरकरार रखा है। अधीनस्थ न्यायालय ने आरोपी को एक साल के साधारण कारावास, दो हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा न करने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
सत्र न्यायाधीश राकेश कैंथला की अपीलीय अदालत ने सदर तहसील के गोड़ा गागल (गागल) निवासी लालमन उर्फ लालू की अपील को निरस्त कर अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है।
तथ्यों के अनुसार 2015 में शिकायतकर्ता नारायण सिंह रात को बस स्टैंड के नजदीक सो रहा था। आरोपी ने उसे उठाया और थप्पड़ मार दिया। उसके बाद डंडे से सिर पर वार कर दिया। गश्त कर रहे पुलिस कर्मियों को मारपीट के बारे में लोगों ने बताया तो वे दोनों को पुलिस थाना ले गए।
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अस्पताल में मेडिकल करवाने पर जाहिर हुआ कि नारायण सिंह के दांत में फ्रेक्चर हुआ है जबकि आरोपी के मेडिकल से शराब पीने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया। अदालत ने आरोपी को उक्त सजा का फैसला सुनाया था। अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सही है कि बस स्टैंड पर कई स्वतंत्र गवाह हो सकते थे।
उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था के अनुसार सिर्फ इसी आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। इसके अलावा मौका पर पहुंचे पुलिस कर्मियों तथा मेडिकल ने पीड़ित से हुई मारपीट की पुष्टि की है। संवाद
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सत्र न्यायाधीश राकेश कैंथला की अपीलीय अदालत ने सदर तहसील के गोड़ा गागल (गागल) निवासी लालमन उर्फ लालू की अपील को निरस्त कर अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है।
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तथ्यों के अनुसार 2015 में शिकायतकर्ता नारायण सिंह रात को बस स्टैंड के नजदीक सो रहा था। आरोपी ने उसे उठाया और थप्पड़ मार दिया। उसके बाद डंडे से सिर पर वार कर दिया। गश्त कर रहे पुलिस कर्मियों को मारपीट के बारे में लोगों ने बताया तो वे दोनों को पुलिस थाना ले गए।
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अस्पताल में मेडिकल करवाने पर जाहिर हुआ कि नारायण सिंह के दांत में फ्रेक्चर हुआ है जबकि आरोपी के मेडिकल से शराब पीने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करके अदालत में अभियोग चलाया। अदालत ने आरोपी को उक्त सजा का फैसला सुनाया था। अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह सही है कि बस स्टैंड पर कई स्वतंत्र गवाह हो सकते थे।
उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था के अनुसार सिर्फ इसी आधार पर आरोपी को बरी नहीं किया जा सकता। इसके अलावा मौका पर पहुंचे पुलिस कर्मियों तथा मेडिकल ने पीड़ित से हुई मारपीट की पुष्टि की है। संवाद