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अदालत ने अपील की निरस्त, पत्नी को देना होगा हर महीने गुजारा भत्ता
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मंडी। घरेलू हिंसा मामलों के एक प्रोटेक्शन आफिसर की अपील अदालत ने निरस्त करते हुए उसे अपनी पत्नी को 10,500 रुपये प्रतिमाह अदा करने का फैसला बरकरार रखा है। प्रोटेक्शन अधिकारी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी।
सत्र न्यायाधीश की अपीलीय अदालत ने उक्त अधिकारी ओम प्रकाश और अन्य ससुरालियों की अपील निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। ट्रायल कोर्ट ने औट तहसील के राह (नगवाईं) निवासी अंजना कुमारी की ओर से घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका में उसके पति ओम प्रकाश को 10,500 रुपये प्रति माह अदा करने का फैसला सुनाया था।
इस राशि में से 3,000 रुपये रिहायश के लिए और 4,000 एवं 3,500 रुपये प्रति माह याचिकाकर्ता और उसकी बेटी को बतौर भरण पोषण गुजारा भत्ता दिया गया था। याचिकाकर्ता का पति घरेलू हिंसा मामलों में प्रोटेक्शन आफिसर (सुपरवाइजर) के रूप में आईसीडीएस विभाग में तैनात है। इस फैसले को ओम प्रकाश तथा अन्य ससुरालियों ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय की व्यवस्थाओं के मुताबिक याचिकाकर्ता के पढ़ी लिखी होने और अपनी जीविका कमाने योग्य होने के कारण गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता से उसके ससुराल में घरेलू हिंसा हुई थी। ऐसे में उससे अपने ससुराल में ही रहने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कमी नहीं है। इसके चलते अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। संवाद
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सत्र न्यायाधीश की अपीलीय अदालत ने उक्त अधिकारी ओम प्रकाश और अन्य ससुरालियों की अपील निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। ट्रायल कोर्ट ने औट तहसील के राह (नगवाईं) निवासी अंजना कुमारी की ओर से घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर याचिका में उसके पति ओम प्रकाश को 10,500 रुपये प्रति माह अदा करने का फैसला सुनाया था।
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इस राशि में से 3,000 रुपये रिहायश के लिए और 4,000 एवं 3,500 रुपये प्रति माह याचिकाकर्ता और उसकी बेटी को बतौर भरण पोषण गुजारा भत्ता दिया गया था। याचिकाकर्ता का पति घरेलू हिंसा मामलों में प्रोटेक्शन आफिसर (सुपरवाइजर) के रूप में आईसीडीएस विभाग में तैनात है। इस फैसले को ओम प्रकाश तथा अन्य ससुरालियों ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। अपीलीय अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय की व्यवस्थाओं के मुताबिक याचिकाकर्ता के पढ़ी लिखी होने और अपनी जीविका कमाने योग्य होने के कारण गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता से उसके ससुराल में घरेलू हिंसा हुई थी। ऐसे में उससे अपने ससुराल में ही रहने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई कमी नहीं है। इसके चलते अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। संवाद