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प्रबंध निदेशक ने चालक की पत्नी को सौंपा नियुक्ति पत्र
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पंडोह बस हादसे में चालक की पत्नी को नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपते प्रबंध निदेशक।
- फोटो : Mandi
मंडी। पंडोह में चार अप्रैल को एचआरटीसी बस हादसे में अपने प्राणों की आहुति देकर 40 सवारियों की जान बचाने वाले बस चालक स्वर्गीय नंद किशोर (33) की धर्मपत्नी चिंता देवी को प्रदेश सरकार ने रिकॉर्ड समय में नौकरी दी है।
चिंता देवी को अनुकंपा आधार पर नहीं बल्कि एचआरटीसी की खास नीति की वजह से इतने कम समय में नौकरी दे पाना संभव हुआ है। उसे 18 दिसंबर 2021 को फैटल-नॉन फैटल पॉलिसी के तहत नौकरी मिली है। इसमें मुख्य रूप से बस दुर्घटना में मृत्यु अथवा ड्यूटी पर हादसे में 80 फीसदी दिव्यांगता पर परिवार के पात्र सदस्य को अधिकतम तीन महीने के अंदर नौकरी देने का प्रावधान है।
इस नीति में एचआरटीसी के अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी समेत सभी कर्मचारियों को कवर किया गया है। नंद किशोर अभी अनुबंध पर थे, पर एचआरटीसी की फैटल-नॉन फैटल पॉलिसी के चलते उनकी धर्मपत्नी को नौकरी देने का मामला इतने कम समय में सिरे चढ़ पाया।
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चिंता देवी को उनकी पात्रता के अनुरूप निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया है। एचआरटीसी के प्रबंधक निदेशक संदीप कुमार ने सोमवार को खुद कोटली उपमंडल के ढंडाल गांव में उनके घर जाकर चिंता देवी को नियुक्ति पत्र सौंपा। उन्हें नजदीकी कोटली बस स्टैंड में तैनाती दी गई है।
....
एचआरटीसी ने दिए 1.25 लाख
प्रबंध निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि एचआरटीसी ने 1.25 लाख रुपये सहायता राशि के रूप में नंद किशोर के परिवार को दिए हैं। एचआरटीसी परिवार ने विशेषकर चालकों और परिचालकों ने योगदान कर 55 हजार रुपये उनके परिवार को सौंपे हैं। 25 हजार रुपये परिवहन मंत्री ने अपनी ओर प्रभावित परिवार को दिए हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से भी सहायता राशि दी गई है।
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चिंता देवी को अनुकंपा आधार पर नहीं बल्कि एचआरटीसी की खास नीति की वजह से इतने कम समय में नौकरी दे पाना संभव हुआ है। उसे 18 दिसंबर 2021 को फैटल-नॉन फैटल पॉलिसी के तहत नौकरी मिली है। इसमें मुख्य रूप से बस दुर्घटना में मृत्यु अथवा ड्यूटी पर हादसे में 80 फीसदी दिव्यांगता पर परिवार के पात्र सदस्य को अधिकतम तीन महीने के अंदर नौकरी देने का प्रावधान है।
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इस नीति में एचआरटीसी के अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी समेत सभी कर्मचारियों को कवर किया गया है। नंद किशोर अभी अनुबंध पर थे, पर एचआरटीसी की फैटल-नॉन फैटल पॉलिसी के चलते उनकी धर्मपत्नी को नौकरी देने का मामला इतने कम समय में सिरे चढ़ पाया।
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चिंता देवी को उनकी पात्रता के अनुरूप निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया है। एचआरटीसी के प्रबंधक निदेशक संदीप कुमार ने सोमवार को खुद कोटली उपमंडल के ढंडाल गांव में उनके घर जाकर चिंता देवी को नियुक्ति पत्र सौंपा। उन्हें नजदीकी कोटली बस स्टैंड में तैनाती दी गई है।
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एचआरटीसी ने दिए 1.25 लाख
प्रबंध निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि एचआरटीसी ने 1.25 लाख रुपये सहायता राशि के रूप में नंद किशोर के परिवार को दिए हैं। एचआरटीसी परिवार ने विशेषकर चालकों और परिचालकों ने योगदान कर 55 हजार रुपये उनके परिवार को सौंपे हैं। 25 हजार रुपये परिवहन मंत्री ने अपनी ओर प्रभावित परिवार को दिए हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन की ओर से भी सहायता राशि दी गई है।