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Mandi News: शिक्षा क्षेत्र में कैसे होगा उद्धार, एक अधिकारी संभाल रहा तीन कार्यभार
Wed, 14 Feb 2024 04:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 14 Feb 2024 04:25 AM IST
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मंडी। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावे जिला मंडी में खोखले साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि पिछले दो सालों से यहां पर एक ही अधिकारी शिक्षा विभाग के उच्च पदों के कार्यभार देख रहे हैं। जिले में उच्च शिक्षा उपनिदेशक और उपनिदेशक निरीक्षण के पद दो सालों से खाली पड़े हैं और इन पदों का कार्यभार प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक ही संभाल रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बन गया है।
स्कूलों में जाकर निरीक्षण करना, सरकार की नीतियों को लागू करना, मिड-डे मिल, छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन, स्कूलों को मान्यता दिलाना, पारदर्शिता के साथ परीक्षाओं को करवाना, छात्र-छात्राओं को स्कूलों में पढ़ाई के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने सहित दर्जनों कार्य मात्र एक अधिकारी के ही जिम्मे है। सीमित संसाधनों के बाद भी यह अधिकारी काम को निपटाने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसके बाद भी शिक्षा क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना छात्र-छात्राओं और अभिभावकों करना पड़ रहा है।
बता दें कि प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक को अपने कार्यालय में कई कार्य निपटाने के बाद उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में भी सेवाएं देनी पड़ रही हैं। यहां पर भी वह काम करने के बाद उपनिदेशक निरीक्षण का काम भी निपटाने में लगे हैं और विभिन्न स्कूलों में जाकर निरीक्षण भी कर रहे हैं। इसके चलते उनके कई काम लंबित हो जाते हैं। इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक अमरनाथ राणा ने बताया कि विभाग और सरकार को खाली पदों के बारे में सूचित किया गया है। फिलहाल वही इन पदों को संभाल रहे हैं।
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जिला में हैं 50 शिक्षा खंड, 2300 स्कूल
बता दें कि जिला मंडी शिक्षा क्षेत्र के लिहाज से भी बहुत बड़ा क्षेत्र है। यहां पर 50 शिक्षा खंड हैं, जबकि 2300 के करीब शिक्षण संस्थान हैं। वहीं, इनमें करीब डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं मौजूदा समय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतने अधिक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता लोने के लिए उच्च स्तर पर अधिकारियों का होना बहुत जरूरी है, लेकिन अभी पिछले दो सालों से एक अधिकारी पर ही यह जिम्मा होने से शिक्षा में सुधार लाना चुनौती बना हुआ है।
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स्कूलों में जाकर निरीक्षण करना, सरकार की नीतियों को लागू करना, मिड-डे मिल, छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन, स्कूलों को मान्यता दिलाना, पारदर्शिता के साथ परीक्षाओं को करवाना, छात्र-छात्राओं को स्कूलों में पढ़ाई के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने सहित दर्जनों कार्य मात्र एक अधिकारी के ही जिम्मे है। सीमित संसाधनों के बाद भी यह अधिकारी काम को निपटाने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसके बाद भी शिक्षा क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना छात्र-छात्राओं और अभिभावकों करना पड़ रहा है।
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बता दें कि प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक को अपने कार्यालय में कई कार्य निपटाने के बाद उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में भी सेवाएं देनी पड़ रही हैं। यहां पर भी वह काम करने के बाद उपनिदेशक निरीक्षण का काम भी निपटाने में लगे हैं और विभिन्न स्कूलों में जाकर निरीक्षण भी कर रहे हैं। इसके चलते उनके कई काम लंबित हो जाते हैं। इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक अमरनाथ राणा ने बताया कि विभाग और सरकार को खाली पदों के बारे में सूचित किया गया है। फिलहाल वही इन पदों को संभाल रहे हैं।
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जिला में हैं 50 शिक्षा खंड, 2300 स्कूल
बता दें कि जिला मंडी शिक्षा क्षेत्र के लिहाज से भी बहुत बड़ा क्षेत्र है। यहां पर 50 शिक्षा खंड हैं, जबकि 2300 के करीब शिक्षण संस्थान हैं। वहीं, इनमें करीब डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं मौजूदा समय में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इतने अधिक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता लोने के लिए उच्च स्तर पर अधिकारियों का होना बहुत जरूरी है, लेकिन अभी पिछले दो सालों से एक अधिकारी पर ही यह जिम्मा होने से शिक्षा में सुधार लाना चुनौती बना हुआ है।