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Mandi News: हरिपुर की सालों पुरानी धरोहरें अनदेखी का शिकार

Sun, 04 Jan 2026 01:54 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:54 AM IST
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Haripur's age-old heritage sites are victims of neglect.
हरिपुर (कांगड़ा)। हरिपुर यानी हरि की नगरी को जिस शासक ने बसाया होगा, शायद यह सोचकर ही बसाया होगा कि मेरे बाद जो भी शासक यहां राज करेंगे, वह इसकी बेहतर से देखभाल करेंगे। इसको सहेजने में अपनी भूमिका अदा करेंगे, लेकिन सत्ताशीनों की इस शहर के प्रति बेरुखी इस कदर हावी हुई कि यह शहर दिन प्रतिदिन खंडहरों में तब्दील होता चला गया। किसी भी सरकार को इस शहर को संवारने की याद तक नहीं आई। इस बात का मलाल आज भी यहां के बाशिंदों को है।
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हरिपुर हेरिटेज डेवलपमेंट सोसायटी के प्रधान सुरेंद्र धीमान ने बताया कि सन 1398 और 1405 ईस्वी के मध्य इस शहर को कांगड़ा के राजा हरिचंद ने बसाया था। गुलेर रियासत का गठन करके हरिपुर को इसकी राजधानी बनाया गया था। पवित्र बाण गंगा के तट पर बसे इस शहर के दूसरी ओर गुलेर है और बीचोबीच बाण गंगा बह रही है। यहां पर पुराना राजाओं का महल और सैकड़ों बेशकीमती धरोहरें हैं, जिनके जीर्णोद्घार के लिए आज तक फोटो सेशन के अलावा कुछ न हो पाना नेताओं की और सरकार की इस क्षेत्र के प्रति बेरुखी को दर्शाता है। यहां की मुख्य धरोहरों में हरिपुर का प्राचीन किला, गोवर्धन धारी मंदिर, शीतला मंदिर, सरस्वती मंदिर, प्राचीन ऐतिहासिक कुएं, बावड़ियां, तालाब, हरिपुर के द्वार, आठ सौ वर्ष पुराना ऐतिहासिक राम मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, धूड़ू महादेव मंदिर, प्राचीन गुफाएं जो बाण गंगा किनारे चट्टानों को के बीचोबीच बनी हैं। इन धरोहरों का अगर सरंक्षण और संवर्धन होता है तो इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। कभी छोटी काशी के नाम से जाना जाने वाला यह शहर आज सरकार की नजर-ए इनायत के लिए तरस रहा है।
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इस धरती पर ही पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी जैसे साहित्यकार और नैनसुख और मनकु जैसे चित्रकारों का जन्म हुआ, जिनकी रचनाओं को विश्व पटल पर विशेष स्थान प्राप्त है। यहीं से ही गुलेर कलम का आगाज हुआ। यूं तो हरिपुर गुलेर को इंटरनेट पर पर्यटन नगरी दर्शाया गया है पर यह हकीकत से कोसों दूर है। लोगों को प्रदेश की व्यवस्था परिवर्तन वाली सरकार से आस है कि इस शहर की बेहतरी के लिए जरूरी कदम जरूर उठाएं जाएंगे।
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देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर का कहना है कि मैं देहरा के लिए काम कर रही हूं। बाकी मैं इस विषय के बारे में आर्कियोलॉजी विभाग से बात करूंगी और कमेटी भी उन्हें पत्र लिखकर बात करे।
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