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Ground Report Mandi : इस सीट पर सिनेमाई बनाम सियासी ग्लैमर की लड़ाई, दिलचस्प है 'किंग' और 'क्वीन' में जंग
Fri, 17 May 2024 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रोली खन्ना, मंडी
रोली खन्ना, मंडी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 05:55 AM IST
सार
अक्सर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत की मंडी की राजनीति में एंट्री के साथ ही सियासी तपिश बढ़ती चली गई। भाजपा की ओर से उम्मीदवारी की घोषणा होते ही कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत की अशोभनीय टिप्पणी से माहौल ऐसा गरमाया कि सीट चर्चा का विषय बन गई। कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा। यहां कंगना का मुकाबला हिमाचल के लोकनिर्माण मंत्री और कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह से है। दोनों के बीच तीखे जुबानी हमले हुए। विक्रमादित्य ने कंगना को मौसमी राजनेता बताकर बीफ खाने का आरोप लगाया, तो कंगना ने उन्हें छोटा पप्पू तक कह दिया। देखना दिलचस्प होगा कि जुबानी टक्कर जितनी कड़ी हो रही है, वोटों के मामले में भी ऐसी ही टक्कर होगी या नहीं?
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विक्रमादित्य सिंह, कंगना रणौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल का सर्वाधिक चर्चित राजनीतिक केंद्र मंडी, कभी मांडव नगर था। तिब्बती भाषा में इसे जहोर कहते थे। मंडी शब्द संस्कृत के मंडोइका से बना है, जिसका अर्थ होता है खुला क्षेत्र। चारों तरफ चट्टानों का घेरा और उनके बीच से होकर गुजरती ब्यास नदी। कभी रियासत की राजधानी रही मंडी को यहां के लोग वाराणसी आफ हिल्स, हिमाचल की काशी या छोटी काशी भी कहते हैं। होटल मैनेजमेंट कोर्स कर रहे युवा अक्षय गर्व से कहते हैं कि वाराणसी की काशी में 80 मंदिर हैं, जबकि यहां पर 81 मंदिर हैं।
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मंडी के प्रवेश द्वार सलापड़ से संसदीय क्षेत्र में प्रवेश करने पर इस इंतजार में हम आगे बढ़ते रहे कि शायद अब कहीं चुनावी माहौल, नजर आ जाए। पर एक अलग सी खामोशी है यहां पर। बहुत कुरेदने पर मतदाता स्थानीय मंडियाली बोली में कहते हैं-एक मट्ठा कने एक मट्ठी, हल्ली लाईरे दुंहाए परखणे। यानी एक बेटा है और एक बेटी है, दोनों को परख रहे, फिर करेंगे वोट। ये देखना मजेदार होगा कि किसके पक्ष में जाता है जनता का वीटो पावर।
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मुद्दे संग आक्रोश भी
पंडोह तीन विधानसभा क्षेत्रों का केंद्र है। सिराज, द्रंग और मंडी के लोग इससे सीधे तौर पर जुड़े हैं। बीते वर्ष आई आपदा में टूटा पंडोह का पुल साक्षी है कि लोग किस कदर जान हथेली पर लेकर रह रहे हैं। इस पुल के कारण जो रास्ता एक से दो मिनट का होता था, वो अब सात-आठ किमी लंबा हो गया है। स्थानीय निवासी अर्जन सिंह, कुलदीप व व्यापार मंडल के प्रधान अश्विनी कुमार कहते हैं कि पुल टूटने से काम पूरी तरह चौपट हो गया, सुनवाई नहीं होती। इतने अहम इलाके में न तहसील है, न बीडीओ दफ्तर व अस्पताल। एक कॉलेज की घोषणा हुई थी, पर नई सरकार ने उसे रद्द कर दिया।
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आंक रहे प्रत्याशियों को
नगवाईं में फल व सब्जी मंडी में काम के साथ जीत-हार पर बाजी लगाते प्रदीप, दिव्यांशु और धर्मेंद्र कहते हैं कि सुक्खू सरकार ने दिया ही क्या। स्नोरघाटी में एक डिस्पेंसरी है। डाक्टर तक नहीं। छात्रों की वर्दी, छोटा डाला खरीदने पर सब्सिडी बंद कर दी। कुल्लू-मनाली की मोहिनी, सोहिनी और मीरा ने दो टूक कहा, महिला होने के नाते हम कंगना को चुनेंगे। नगवाईं के कृष्णपाल, आनी के निशान और मीरा कहते हैं, विक्रमादित्य में व्यावहारिकता है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम के प्रभुत्व वाले इलाके सिराज में एक युवती ने आक्रोश इस तरह से जताया- हम कैसे अपने भाई को सेना मे जाने को कहें, अग्निवीर में चार साल बाद क्या होगा उसका। विक्रमादित्य भले ही सड़क न बनवाएं, पर राजनीति जानते हैं, कुछ तो करेंगे।
तगड़ी लड़ाई
पंडोह निवासी श्रीनेत्रपाल (69) कहते हैं कि फाइट तगड़ी है। कंगना को लोग पसंद कर रहे हैं। मंडी के मुख्य बाजार इंदिरा मार्केट में पूनम कहती हैं कि कंगना बड़ा चेहरा है, ग्लैमर है, तो क्या बुराई है। वहीं, मंडी के राधाकृष्ण कहते हैं कि विक्रमादित्य का रुतबा व चमक भी देखना चाहिए। दरअसल, विक्रमादित्य को लोग पिता वीरभद्र सिंह के रसूख से जोड़कर देखते हैं।