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सीएम ने कर्मचारियों को थमाया आश्वासनों का झुनझुना
मंडी
Updated Fri, 30 Dec 2016 10:13 PM IST
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कर्मचारी
- फोटो : डेमो फोटो
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मंडी। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक को पूरी तरह फ्लॉप करार दिया है। प्रेस को जारी बयान में महासंघ के महामंत्री एनआर ठाकुर ने कहा कि बैठक से प्रदेश के कर्मचारियों को बहुत उम्मीदें थी लेकिन सिवाय आश्वासनों के उन्हें इस बैठक में कुछ नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने बैठक में कर्मचारियों को आश्वासनों का झुनझुना थमाकर एक बार फिर से बरगलाने का प्रयास किया है। जो हश्र आज से चार साल पहले बुलाई गई संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक का हुआ था, वहीं हश्र इस बैठक का भी हुआ है। यह बैठक 100 फीसदी असफल रही है। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किस्त देकर टरका दिया।
यह प्रदेश के कर्मचारियों का दुर्भाग्य है कि उन्हें ऐसे कर्मचारी नेता झेलने पड़ रहे हैं जिन्हें कर्मचारी मुद्दों की न तो समझ है और न ही उन्हें मनवाने का माद्दा। यह स्वार्थी कर्मचारी नेता राजनेताओं की गोद में बैठकर वहीं भाषा बोलते हैं जो सरकार इनके मुंह से बुलवाना चाहती है। इन कर्मचारी नेताओं को कर्मचारी हितों की कम परवाह और अपने निजी हितों की ज्यादा चिंता है। यही वजह है कि 150 के करीब कर्मचारियों की जायज मांगें इन्होंने अपने स्वार्थ की बलि चढ़ा दी। चुनावी वर्ष में ऐसा लगता है कि सरकार झूठे वायदे कर कर्मचारियों को अपने पक्ष में करने की तैयारी में है लेकिन प्रदेश का कर्मचारी समझदार है और वह सरकार के झूठे लारे-लप्पों में नहीं फंसेगा।
इस बैठक से कांग्रेस सरकार का कर्मचारी विरोधी चेहरा सबके सामने आ गया है। 4-9-14, सेवानिवृत्ति आयु 58 से 60 वर्ष करना, अनुबंध कर्मचारियों को तीन वर्ष में नियमित करना, करुणामूलक आधार पर नौकरियां देना तथा पंजाब की तर्ज पर वेतन और भत्तों की अदायगी आदि ऐसे अनेक महत्वपूर्ण फैसले सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिए। महंगाई भत्ते की किस्त जो जुलाई महीने से देय थी, उसे फरवरी माह से देने के आदेश भी कर्मचारियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर गए। कांग्रेस सरकार के साथ कर्मचारी प्रतिनिधियों की यह अंतिम बैठक थी तथा इसका इस तरह से असफल होना कर्मचारियों की भावनाओं के साथ भारी कुठाराघात है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बैठक में लिए गए फैसलों को एक महीने के अंदर लागू किया जाए अन्यथा प्रदेश के कर्मचारी आने वाले चुनावों में पाई-पाई का हिसाब लेंगे।
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यह प्रदेश के कर्मचारियों का दुर्भाग्य है कि उन्हें ऐसे कर्मचारी नेता झेलने पड़ रहे हैं जिन्हें कर्मचारी मुद्दों की न तो समझ है और न ही उन्हें मनवाने का माद्दा। यह स्वार्थी कर्मचारी नेता राजनेताओं की गोद में बैठकर वहीं भाषा बोलते हैं जो सरकार इनके मुंह से बुलवाना चाहती है। इन कर्मचारी नेताओं को कर्मचारी हितों की कम परवाह और अपने निजी हितों की ज्यादा चिंता है। यही वजह है कि 150 के करीब कर्मचारियों की जायज मांगें इन्होंने अपने स्वार्थ की बलि चढ़ा दी। चुनावी वर्ष में ऐसा लगता है कि सरकार झूठे वायदे कर कर्मचारियों को अपने पक्ष में करने की तैयारी में है लेकिन प्रदेश का कर्मचारी समझदार है और वह सरकार के झूठे लारे-लप्पों में नहीं फंसेगा।
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इस बैठक से कांग्रेस सरकार का कर्मचारी विरोधी चेहरा सबके सामने आ गया है। 4-9-14, सेवानिवृत्ति आयु 58 से 60 वर्ष करना, अनुबंध कर्मचारियों को तीन वर्ष में नियमित करना, करुणामूलक आधार पर नौकरियां देना तथा पंजाब की तर्ज पर वेतन और भत्तों की अदायगी आदि ऐसे अनेक महत्वपूर्ण फैसले सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिए। महंगाई भत्ते की किस्त जो जुलाई महीने से देय थी, उसे फरवरी माह से देने के आदेश भी कर्मचारियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर गए। कांग्रेस सरकार के साथ कर्मचारी प्रतिनिधियों की यह अंतिम बैठक थी तथा इसका इस तरह से असफल होना कर्मचारियों की भावनाओं के साथ भारी कुठाराघात है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बैठक में लिए गए फैसलों को एक महीने के अंदर लागू किया जाए अन्यथा प्रदेश के कर्मचारी आने वाले चुनावों में पाई-पाई का हिसाब लेंगे।
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