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Mandi News: अवकाश में अस्पतालों में बंद रहते निशुल्क दवा केंद्र, भटकते हैं मरीज
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मंडी। अवकाश वाले दिन मंडी जिले के सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवा केंद्र बंद रहने से आपातकाल में पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशान होना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें निजी दुकानों से महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। अस्पताल परिसर में निशुल्क दवाइयों की फार्मेसी अवकाश के दिन बंद रहती है।
नागरिक और क्षेत्रीय अस्पताल में अवकाश के दौरान तैनात एकमात्र चिकित्सक भी मरीजों को दवाएं लिखते हैं लेकिन सरकारी स्तर पर यह उपलब्ध नहीं हो पाती है। फिर मजबूरन मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है।
मंडी शहर के बुद्धिजीवी अशोक कुमार राणा, डीएन वर्मा, भुवनेश्वरी, चंपा ठाकुर, ललित शर्मा आदि का कहना है कि रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए जिस तरह आपातकाल में चिकित्सकों, पैरा स्टाफ और सफाई कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही है, उसी तरह लोगों की सुविधा के लिए खोले गए निशुल्क दवा केंद्रों में भी कर्मचारियों की तैनाती की जाए।
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अवकाश वाले दिन सहकारी दवाइयों की दुकानें खुली रहती है। मरीज वहां से सस्ती दवाइयां खरीद सकते हैं। अस्पताल आने वाले मरीज की बीमारी और हालत देख कर ही उपचार दिया जाता है। आवश्यक होने पर उन्हें इंजेक्शन लगाए जाते हैं या जरूरी होने पर अस्पताल में भर्ती किया जाता है। स्टाफ की कमी के चलते अवकाश वाले दिन निशुल्क दवा केंद्रों में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती कर पाना संभव नहीं है।
-डॉ. दीपाली शर्मा, सीएमओ मंडी
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नागरिक और क्षेत्रीय अस्पताल में अवकाश के दौरान तैनात एकमात्र चिकित्सक भी मरीजों को दवाएं लिखते हैं लेकिन सरकारी स्तर पर यह उपलब्ध नहीं हो पाती है। फिर मजबूरन मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है।
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मंडी शहर के बुद्धिजीवी अशोक कुमार राणा, डीएन वर्मा, भुवनेश्वरी, चंपा ठाकुर, ललित शर्मा आदि का कहना है कि रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए जिस तरह आपातकाल में चिकित्सकों, पैरा स्टाफ और सफाई कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही है, उसी तरह लोगों की सुविधा के लिए खोले गए निशुल्क दवा केंद्रों में भी कर्मचारियों की तैनाती की जाए।
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अवकाश वाले दिन सहकारी दवाइयों की दुकानें खुली रहती है। मरीज वहां से सस्ती दवाइयां खरीद सकते हैं। अस्पताल आने वाले मरीज की बीमारी और हालत देख कर ही उपचार दिया जाता है। आवश्यक होने पर उन्हें इंजेक्शन लगाए जाते हैं या जरूरी होने पर अस्पताल में भर्ती किया जाता है। स्टाफ की कमी के चलते अवकाश वाले दिन निशुल्क दवा केंद्रों में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती कर पाना संभव नहीं है।
-डॉ. दीपाली शर्मा, सीएमओ मंडी
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