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Mandi News: आयुर्वेदिक फार्मेसी के आधारभूत ढांचे में विस्तार

Fri, 03 Jan 2025 07:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Fri, 03 Jan 2025 07:41 AM IST
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Expansion in infrastructure of Ayurvedic Pharmacy
जोगिंद्रनगर के अपरोच रोड़ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी में दवाईयों की पैकिंग। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। सूबे की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर के आधारभूत ढांचे में विस्तार होते ही औषधीय दवाओं का निर्माण दोगुना बढ़ा है। जीएमपी के तहत (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रोटोकॉल) दवाइयों का निर्माण के लिए अधिकारिक स्वीकृति और करोड़ों के बजट से आधुनिक मशीनों में विस्तार किया गया है। इससे हर प्रकार की औषधीय दवाओं का निर्माण लगातार बढ़ रहा है।
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1200 स्वास्थ्य केंद्रों और 34 के करीब उपमंडलीय अस्पतालों में नए साल में औषधीय दवाओं का अभाव नहीं रहेगा। प्रदेश की तीन मुख्य फार्मेसियों में लगभग 70 हजार क्विंटल औषधीय दवा, सिरप, भस्में, चूर्ण और दर्द निवारक तेलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 20 से अधिक प्रकार की दवाओं का निर्माण इस साल आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर, पपरोला व माजरा में हो रहा है।
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इनमें जोगिंद्रनगर आयुर्वेदिक फार्मेसी में 40 हजार क्विंटल औषधियों के निर्धारित लक्ष्य के साथ दवाओं की गुणवता के परीक्षण भी मापदंडों पर सही उतरे हैं। 1500 किलो विलव चूर्ण का निर्माण पूरा हो चुका है। 1500 किलोग्राम अर्जुन तवाक चूर्ण भी इसी माह तैयार हो जाएगा। इसके अलावा 11 अन्य प्रकार की दवाएं भी प्रदेश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी में तैयार हो रही हैं। इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ का बजट वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जारी हुआ है। इसी प्रकार जिला कांगड़ा के बैजनाथ पपरोला स्थित आयुर्वेदिक फार्मेसी और नाहन जिला के माजरा में भी आयुर्वेदिक फार्मेसी में करीब 30 हजार क्विंटल औषधीय दवाओं का निर्माण किया जा रहा है।
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उधर, जोगिंद्रनगर में आयुर्वेद फार्मेसी के प्रभारी डॉ. नीलम ने बताया कि दवा निर्माण में शत प्रतिशत स्वच्छता के उद्देश्य से गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। गुड मेन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस और केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेदिक पद्धति की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए औषधीय दवाओं के निर्माण में सफलता हासिल करने के बाद अन्य दवाओं के निर्माण में बढ़ोतरी के प्रयास भी जारी है।


जीएमपी यानी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रोटोकॉल दवाओं में हाईजीन के लिए वरदान साबित हो रहा है। करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनरियों की उपलब्धता और आयुर्वेदिक फार्मेसी के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ कर हाईजीन को पूरा ध्यान में रखते हुए औषधीय दवाइयों का निर्माण शुरू हुआ है। औषधि के निर्माण के लिए फार्मेसी में सनरूफ शैडों के निर्माण के बाद औषधियों का भंडारण वातानुकूल किया जा रहा है।
-डॉ. आनंदी शैली, उपनिदेशक, आयुर्वेद विभाग मंडी
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