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Mandi News: उत्साह और उमंग.... आस्था में डूबी छोटी काशी
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मंडी। छोटी काशी में देवधुन के बीच आस्था का सैलाब उमड़ा। देवी-देवताओं की झलक पाने के उत्साह और उमंग ने हर किसी को रोमांचित कर दिया। शहर में निकली जलेब से ऐसा लगा कि मानो देवलोक धरती पर उतर आया हो। पूरे शहर में देवी-देवताओं के साथ नाचते गाते देवलुओं ने शहर की शोभा चार गुना कर दी। अवसर था अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि पर्व के शुभारंभ का। दोपहर बाद जैसे ही राज देवता माधो राय मंदिर परिसर से प्रथम जलेब निकली तो लोग देवी देवताओं की झलक पाने के लिए सड़कों पर उतर आए। ऐतिहासिक सेरी मंच लोगों की भीड़ से भर गया।
जहां से भी जलेब गुजरी, लोग देवी-देवताओं के आगे नतमस्तक होते नजर आए। लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इन लम्हों को कैद करने का भी कोई मौका हाथ से जाने नहीं दिया। घरों की छतों पर भी लोग भव्य जलेब का नजारा निहारते रहे। शहर से गुजरने वाले लोगों के कदम भी जलेब के दौरान ठहर गए। जलेब के दौरान शहर में यातायात को एकतरफा कर दिया गया। इससे कि जलेब के दौरान देवी-देवताओं और देवलुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जलेब के रूट में बदलाव
सत्तर के दशक के बाद पहली बार जलेब के रूट में बदलाव देखने को मिला। राजकीय वल्लभ महाविद्यालय के प्रवेशद्वार के बजाय इस बार अंतरराज्यीय बस अड्डा मंडी के ठीक सामने वाले गेट से जलेब ने पड्डल मैदान में प्रवेश किया। पड्डल स्टेडियम में जलेब के प्रवेश होते ही देवलू खुले मैदान में बैठ गए जबकि देवी-देवता निर्धारित पैगोड़ा शैली के डोम में विराजमान होते रहे। इस कारण पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने वाले स्थल में अधिक भीड़ नहीं देखी गई। सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने बताया कि पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने का स्थान और क्रम निर्धारित कर दिया गया है। आने वाले वर्षों में भी देवी-देवता इसी तर्ज पर बैठेंगे।
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जहां से भी जलेब गुजरी, लोग देवी-देवताओं के आगे नतमस्तक होते नजर आए। लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इन लम्हों को कैद करने का भी कोई मौका हाथ से जाने नहीं दिया। घरों की छतों पर भी लोग भव्य जलेब का नजारा निहारते रहे। शहर से गुजरने वाले लोगों के कदम भी जलेब के दौरान ठहर गए। जलेब के दौरान शहर में यातायात को एकतरफा कर दिया गया। इससे कि जलेब के दौरान देवी-देवताओं और देवलुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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जलेब के रूट में बदलाव
सत्तर के दशक के बाद पहली बार जलेब के रूट में बदलाव देखने को मिला। राजकीय वल्लभ महाविद्यालय के प्रवेशद्वार के बजाय इस बार अंतरराज्यीय बस अड्डा मंडी के ठीक सामने वाले गेट से जलेब ने पड्डल मैदान में प्रवेश किया। पड्डल स्टेडियम में जलेब के प्रवेश होते ही देवलू खुले मैदान में बैठ गए जबकि देवी-देवता निर्धारित पैगोड़ा शैली के डोम में विराजमान होते रहे। इस कारण पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने वाले स्थल में अधिक भीड़ नहीं देखी गई। सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा ने बताया कि पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने का स्थान और क्रम निर्धारित कर दिया गया है। आने वाले वर्षों में भी देवी-देवता इसी तर्ज पर बैठेंगे।
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