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Mandi News: नारला-मंडी पैच पर हवा में लटका दिए पेयजल पाइप, जनता में आक्रोश
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फोरलेन निर्माण कंपनी की लापरवाही से 3.37 करोड़ के बजट पर फिरा पानी
एक्सईएन बोले, बिना काम नहीं मिलेगी एनओसी, जल शक्ति विभाग ने दिए संयुक्त निरीक्षण के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। नारला-मंडी फोरलेन निर्माण के चलते क्षेत्र में पेयजल सहित मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। जल शक्ति विभाग की संपत्तियों का डीपीआर के अनुसार रख-रखाव न होने पर लोगों में रोष है। क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों और टैंकों की मरम्मत के लिए अनुबंध में 3.37 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसकी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की है। आरोप है कि कंपनी ने मरम्मत के बजाय लोहे के पाइपों की जगह प्लास्टिक के पाइप हवा में लटका दिए हैं, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। नारला से महेड़ तक सड़क निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन पेयजल समस्या बनी हुई है। कुन्नू में क्षतिग्रस्त जल भंडारण टैंक का पुनर्निर्माण भी नहीं किया गया। माणा, कुन्नू, साहल और पाली गांवों में सिंचाई कूहलें, रास्ते और पेयजल लाइनें मलबे से प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और कंपनी पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त मंडी से संयुक्त निरीक्षण में प्रभावित पंचायतों को शामिल करने की मांग की है।
कोट्स
धरातल पर काम सही ढंग से नहीं हुआ है और जनता की शिकायतें जायज हैं। सहायक अभियंता को संयुक्त निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। कंपनी को एनओसी तभी मिलेगी, जब वह नुकसान की भरपाई और सही निर्माण करेगी। -राकेश ठाकुर, अधिशाषी अभियंता, जल शक्ति विभाग
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एक्सईएन बोले, बिना काम नहीं मिलेगी एनओसी, जल शक्ति विभाग ने दिए संयुक्त निरीक्षण के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
पधर (मंडी)। नारला-मंडी फोरलेन निर्माण के चलते क्षेत्र में पेयजल सहित मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। जल शक्ति विभाग की संपत्तियों का डीपीआर के अनुसार रख-रखाव न होने पर लोगों में रोष है। क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों और टैंकों की मरम्मत के लिए अनुबंध में 3.37 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसकी जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की है। आरोप है कि कंपनी ने मरम्मत के बजाय लोहे के पाइपों की जगह प्लास्टिक के पाइप हवा में लटका दिए हैं, जिससे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। नारला से महेड़ तक सड़क निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन पेयजल समस्या बनी हुई है। कुन्नू में क्षतिग्रस्त जल भंडारण टैंक का पुनर्निर्माण भी नहीं किया गया। माणा, कुन्नू, साहल और पाली गांवों में सिंचाई कूहलें, रास्ते और पेयजल लाइनें मलबे से प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और कंपनी पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त मंडी से संयुक्त निरीक्षण में प्रभावित पंचायतों को शामिल करने की मांग की है।
कोट्स
धरातल पर काम सही ढंग से नहीं हुआ है और जनता की शिकायतें जायज हैं। सहायक अभियंता को संयुक्त निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं। कंपनी को एनओसी तभी मिलेगी, जब वह नुकसान की भरपाई और सही निर्माण करेगी। -राकेश ठाकुर, अधिशाषी अभियंता, जल शक्ति विभाग
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