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Mandi News: करीब दो साल अलग रहने के बाद पति-पत्नी की आपसी सहमति से तलाक
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फैमिली कोर्ट मंडी ने याचिका मंजूर कर विवाह विच्छेद की डिक्री जारी की
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फैमिली कोर्ट मंडी ने आपसी सहमति से तलाक की मांग को लेकर दायर याचिका मंजूर करते हुए पति-पत्नी का विवाह विच्छेद करने के आदेश दिए हैं। प्रधान न्यायाधीश की अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत यह फैसला सुनाया। दोनों पक्ष अगस्त 2024 से अलग रह रहे थे और उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं थी।
दोनों का विवाह दिसंबर 2022 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दंपती के कोई संतान नहीं है। आपसी मतभेदों के चलते दोनों अगस्त 2024 से अलग रहने लगे थे। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने के लिए 16 मार्च 2026 को फैमिली कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर की।
अदालत में पहली और दूसरी मोशन के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। दोनों ने विवाह विच्छेद के लिए अपनी सहमति दोहराते हुए कहा कि वे अब एक साथ रहने में असमर्थ हैं और उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं है।
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अदालत ने दोनों पक्षों के बयानों और याचिका पर विचार करने के बाद संतुष्टि जताई कि तलाक के लिए उनकी सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक है तथा किसी प्रकार के दबाव, धोखाधड़ी या अनुचित प्रभाव में नहीं दी गई है। इसके बाद अदालत ने याचिका मंजूर कर विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। फैमिली कोर्ट मंडी ने आपसी सहमति से तलाक की मांग को लेकर दायर याचिका मंजूर करते हुए पति-पत्नी का विवाह विच्छेद करने के आदेश दिए हैं। प्रधान न्यायाधीश की अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत यह फैसला सुनाया। दोनों पक्ष अगस्त 2024 से अलग रह रहे थे और उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं थी।
दोनों का विवाह दिसंबर 2022 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दंपती के कोई संतान नहीं है। आपसी मतभेदों के चलते दोनों अगस्त 2024 से अलग रहने लगे थे। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने के लिए 16 मार्च 2026 को फैमिली कोर्ट में संयुक्त याचिका दायर की।
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अदालत में पहली और दूसरी मोशन के दौरान दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। दोनों ने विवाह विच्छेद के लिए अपनी सहमति दोहराते हुए कहा कि वे अब एक साथ रहने में असमर्थ हैं और उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं है।
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अदालत ने दोनों पक्षों के बयानों और याचिका पर विचार करने के बाद संतुष्टि जताई कि तलाक के लिए उनकी सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक है तथा किसी प्रकार के दबाव, धोखाधड़ी या अनुचित प्रभाव में नहीं दी गई है। इसके बाद अदालत ने याचिका मंजूर कर विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी।