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Mandi News: पति को बचाते खुद मौत के मुंह में चली गई पत्नी
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मक्की की बिजाई करने शिमला से छुट्टी पर आई थीं पार्वती
देवेंद्र गुप्ता
सुंदरनगर (मंडी)। जयदेवी क्षेत्र के गहरी गांव में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में एक मां को अपने पति को बचाने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। मृतका पार्वती देवी प्रदेश सचिवालय शिमला में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं। वह घर में मक्की की बिजाई के लिए शनिवार को शिमला से गांव आई थीं। परिजनों के अनुसार रविवार को पति-पत्नी ने दिनभर खेतों में काम किया। रात को उनका बेटा नशे की हालत में घर पहुंचा और किसी बात को लेकर पिता फागनु राम से उलझ पड़ा। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और पति को बेटे से बचाने के लिए बीचबचाव करने आईं पार्वती देवी की डंडे के वार से मौके पर ही मौत हो गई।
पार्वती देवी लंबे समय से शिमला में अपने बेटे, बहू और पोते के साथ रह रही थीं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थी। उनका बेटा निजी तौर पर प्लंबिंग का काम करता था, लेकिन नशे का आदी बताया जा रहा है। घटना के समय भी वह नशे में था। जिस मां ने बेटे का पालन-पोषण कर उसे बड़ा किया, उसी की जान उसके हाथों चली गई।
बुढ़ापे में छिन गया सहारा
इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घायल फागनु राम ने अपनी जीवनसंगिनी खो दी है, जो परिवार का सबसे बड़ा सहारा थीं। परिवार में एक अन्य बेटा और एक बेटी भी है। बेटी की शादी हो चुकी है जबकि बहू और पोता शिमला में रहते हैं। हादसे के बाद फागनु राम खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रहे हैं।
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देवेंद्र गुप्ता
सुंदरनगर (मंडी)। जयदेवी क्षेत्र के गहरी गांव में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में एक मां को अपने पति को बचाने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। मृतका पार्वती देवी प्रदेश सचिवालय शिमला में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं। वह घर में मक्की की बिजाई के लिए शनिवार को शिमला से गांव आई थीं। परिजनों के अनुसार रविवार को पति-पत्नी ने दिनभर खेतों में काम किया। रात को उनका बेटा नशे की हालत में घर पहुंचा और किसी बात को लेकर पिता फागनु राम से उलझ पड़ा। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और पति को बेटे से बचाने के लिए बीचबचाव करने आईं पार्वती देवी की डंडे के वार से मौके पर ही मौत हो गई।
पार्वती देवी लंबे समय से शिमला में अपने बेटे, बहू और पोते के साथ रह रही थीं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के कंधों पर थी। उनका बेटा निजी तौर पर प्लंबिंग का काम करता था, लेकिन नशे का आदी बताया जा रहा है। घटना के समय भी वह नशे में था। जिस मां ने बेटे का पालन-पोषण कर उसे बड़ा किया, उसी की जान उसके हाथों चली गई।
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बुढ़ापे में छिन गया सहारा
इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घायल फागनु राम ने अपनी जीवनसंगिनी खो दी है, जो परिवार का सबसे बड़ा सहारा थीं। परिवार में एक अन्य बेटा और एक बेटी भी है। बेटी की शादी हो चुकी है जबकि बहू और पोता शिमला में रहते हैं। हादसे के बाद फागनु राम खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रहे हैं।
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