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जोगिंद्रनगर के गली-मुहल्लों में उत्सव सा माहौल
मंडी।
Updated Sun, 03 Apr 2016 07:11 PM IST
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जोगिंद्रनगर देव मेले में शिरकत करने आए चौहारघाटी के देवता मेहमानबाजी में पहुंचे।
- फोटो : अमर उजाला
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर के पांच दिवसीय मेले के तीसरे दिन मेले में पधारे देवी-देवताओं की घर-आंगन में खातिरदारी का सिलसिला शुरू हो गया। घर का न्योता देकर देवी-देवताओं का मान-सम्मान और उनके साथ आए देवलुओं की आदर-खातिर को लेकर लोगों में खासी आस्था है।
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देवताओं के साथ चलने वाले पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से मेला परिसर ही नहीं बल्कि जोगिंद्रनगर क्षेत्र गूंज रहा है। मेले में आए देवी-देवताओं की आवभगत कर लोग सुख समृद्धि का आशीर्वाद ले रहे हैं। इस बीच घरों में देवी-देवताओं की इस आवभगत के दौरान मंगलचारी भी व्यस्त है। मंगलचारी घर-घर जाकर शहनाई पर मंगल धुन बजा रहे हैं। मेले के लिए पधारे देवी-देवताओं के ठहरने और उनके साथ आए देवलुओं के खान-पान के लिए मेला कमेटी प्रशासन की ओर से व्यवस्था गई है। लेकिन, श्रद्धालुओं के निमंत्रण पर अधिकांश देवी-देवताओं ने इस व्यवस्था से परे हट कर घरों में मेहमान बाजी पसंद की है।
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कई देवता और उनके देवलु निमंत्रण पर रविवार को ही श्रद्धालुओं के घर चले गए। निमंत्रण स्वीकार होने से खुश श्रद्धालु देवताओं के रथों को अपने कंधों पर उठाकर घर पहुंचा रहे हैं। देवी-देवतओं के घरों में पहुंचने से जोगिंद्रनगर के गली-मुहल्लों में उत्सव सा माहौल बन गया है। नवरात्रों के दौरान घरों में देवी-देवताओं के पहुंचने को श्रद्धालु काफी शुभ मान रहे हैं। इसके चलते मेले के तीसरे दिन वीरवार को दोपहर तक मेले में आए अधिकांश देवी-देवता श्रद्धालुओं के घरों में मेहमान बाजी में रहे। दोपहर बाद, देवी देवता मेला मैदान में एक दूसरे से मिल और फिर शाम तक उनके घूमने फिरने का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं के घरों में देवी-देवताओं की मेहमाननवाजी की यह दशकों से चली आ रही परंपरा आशीर्वाद लेने और मन्नत पूरी होने पर आधारित है।
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