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मुकदमा दर्ज न करने पर सदर थाना के अफसरों समेत स्टाफ पर विभागीय जांच के आदेश
मंडी
Updated Sun, 14 May 2017 10:24 PM IST
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मंडी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर एक संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने एक चालक की एफआईआर दर्ज न करने के मामले में पुलिस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना ठहराया है। पुलिस अधीक्षक को उस समय संबंधित सदर थाना में तैनात अफसरों सहित स्टाफ पर मामले में जांच के आदेश दिए हैं। जबकि प्रभावित की याचिका को स्वीकार करते हुए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी जारी किए हैं।
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याचिका में बल्ह के बैहना गांव निवासी विनोद कुमार पुत्र संत राम ने कहा था कि टैैक्सी का कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टर ने उसे बंदी बनाकर पीटा है और जान से मारने की धमकी दी। आरोप है कि सवारियां छोड़कर खाली टैक्सी वापस लाने पर गुस्साए संचालक ने चालक को न केवल बेरहमी से पीटा बल्कि उसे बंदी बनाकर यातनाएं भी दीं। किसी तरह जान बचाकर भागे चालक ने पुलिस थाना में इसकी शिकायत की, लेकिन इसे दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सदर पुलिस थाना की ओर से शिकायतकर्ता की शिकायत पर संवेदनहीनता और लापरवाही पूर्ण तरीके से कार्रवाई की गई है। जिसके चलते अदालत ने संज्ञान लेते हुए पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिला पुलिस अधीक्षक को आदेश की प्रति प्रेषित करके प्राथमिकी दर्ज न करने वाले सदर पुलिस थाना के दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर उचित कार्रवाई करने को कहा है।
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पुलिस रपटों में तथ्यों का हवाला पर, कार्रवाई नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले के रिकार्ड से जाहिर होता है कि पुलिस ने शिकायतकर्ता के आरोपों पर सही ढंग से कार्रवाई नहीं की है। शिकायतकर्ता का कहना था कि आरोपी ने उन्हें गलत तरीके से अवरोधित करके उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। हालांकि इन तथ्यों का हवाला पुलिस रपटों में भी दर्ज है। लेकिन पुलिस ने इन रपटों पर कोई संज्ञान न लेते हुए मामूली मारपीट होने का मामला मानते हुए प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। इस बारे में बैहना गांव निवासी अधिवक्ता रवि कुमार बधान ने अदालत में याचिका दायर करते हुए पुलिस थाना में दर्ज रपटें तथा मेडिकल रिपोर्ट दायर करके प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई थी।
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पेशे से चालक है शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता के अनुसार वह पेशे से ड्राइवर है और आरोपी की गाड़ी चलाता था। उसे कार्यवश गाड़ी के साथ भेजा गया था। लेकिन, जब वह लौटा तो आरोपी गाड़ी के मालिक का कहना था कि वह वापसी में गाड़ी खाली क्यों ले आया? शिकायतकर्ता के वेतन मांगने पर आरोपी ने उससे मारपीट की थी और उसे जान से मारने की धमकी देकर बंदी बना लिया था। किसी तरह से वहां से भाग जाने के बाद शिकायतकर्ता ने सदर थाना पुलिस में शिकायत करवाई थी। लेकिन, पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज न करने पर उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।