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Mandi News: छेश्चू मेले में झंडा रस्म के लिए उमड़ी भीड़
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पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की
निगमापा बौद्ध मठ के प्रांगण में हुई झंडा रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। रिवालसर में आयोजित राज्य स्तरीय छेश्चू मेले का समापन शुक्रवार को पारंपरिक झंडा चढ़ाने की धार्मिक रस्म के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। प्राचीन निंगमपा बौद्ध मठ के प्रांगण में आयोजित इस पवित्र अनुष्ठान में बौद्ध श्रद्धालुओं ने बड़ी तादाद में भाग लेकर आस्था प्रकट की।
मेले के अंतिम दिन सुबह से ही निंगमपा परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंत्रोच्चारण और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद लामा समुदाय की अगुवाई में पवित्र झंडा चढ़ाने की रस्म संपन्न हुई। छेश्चू धार्मिक पर्व में झंडा चढ़ाने की परंपरा को बौद्ध धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक कड़ी माना जाता है। मान्यता है कि मंत्रोच्चारित विभिन्न रंगों के पवित्र झंडे चढ़ाने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुरूप अलग-अलग रंगों के झंडे अर्पित करते हैं, जिन पर बौद्ध मंत्र अंकित होते हैं। राज्य स्तरीय मेला रिवालसर की धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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निगमापा बौद्ध मठ के प्रांगण में हुई झंडा रस्म
संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। रिवालसर में आयोजित राज्य स्तरीय छेश्चू मेले का समापन शुक्रवार को पारंपरिक झंडा चढ़ाने की धार्मिक रस्म के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। प्राचीन निंगमपा बौद्ध मठ के प्रांगण में आयोजित इस पवित्र अनुष्ठान में बौद्ध श्रद्धालुओं ने बड़ी तादाद में भाग लेकर आस्था प्रकट की।
मेले के अंतिम दिन सुबह से ही निंगमपा परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंत्रोच्चारण और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद लामा समुदाय की अगुवाई में पवित्र झंडा चढ़ाने की रस्म संपन्न हुई। छेश्चू धार्मिक पर्व में झंडा चढ़ाने की परंपरा को बौद्ध धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक कड़ी माना जाता है। मान्यता है कि मंत्रोच्चारित विभिन्न रंगों के पवित्र झंडे चढ़ाने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुरूप अलग-अलग रंगों के झंडे अर्पित करते हैं, जिन पर बौद्ध मंत्र अंकित होते हैं। राज्य स्तरीय मेला रिवालसर की धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है। इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं, जिनमें स्थानीय लोगों के साथ दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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