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हत्यारे पति को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, मंडी।
Updated Wed, 04 Jan 2017 10:25 PM IST
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पत्नी की हत्या के दोषी पति को अदालत ने कठोर उम्रकैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर एक साल के अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूने राम पहाड़िया के न्यायालय ने सुंदरनगर तहसील के कुशला (जैदेवी) निवासी देवी राम पुत्र माघू राम के खिलाफ भादंसं की धारा 302 और 201 के तहत हत्या करने और सबूत मिटाने का अभियोग साबित होने पर कठोर उम्रकैद और एक साल की कठोर कारावास और 15000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि को निश्चित समय में अदा न करने पर एक साल और तीन माह की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। ये सभी सजाएं एक साल चलेंगी।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले के शिकायतकर्ता नारायणु के छोटे भाई आरोपी देवी राम की शादी करीब 10 साल पहले मंजीत कौर के साथ हुई थी। 29 अप्रैल, 2013 को शिकायतकर्ता और आरोपी अपने परिवार सहित शादी में गए हुए थे। जब शिकायतकर्ता शादी में भाग लेने के बाद घर लौट रहा था तो उसे नाले से आरोपी के रोने की आवाज सुनाई दी। शिकायतकर्ता आरोपी के पास गया और नाले के पास आने की वजह पूछी। उसने कहा कि वह नाले में गिर गया है। शिकायतकर्ता ने जब आरोपी से उसकी पत्नी कौशल्या के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह अपने मायके चली गई है।
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शिकायतकर्ता उसे नाले से उठाकर सड़क पर लाया तो वहां अन्य लोगों की मौजूदगी में आरोपी ने कौशल्या के ससुराल में ही होने की बात की। संदेह होने पर शिकायतकर्ता ने गांववासियों के साथ जंगल में कौशल्या को खोजने की कोशिश की तो वह घायल अवस्था में अचेत पड़ी हुई मिली। शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों ने दोनों को सुंदरनगर अस्पताल पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने कौशल्या को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर हत्या का मामला दर्ज करके तहकीकात शुरू की। पुलिस तहकीकात में यह सामने आया था कि आरोपी का एक लड़की के साथ अवैध संबंध था। इसके कारण उसके पत्नी के साथ अच्छे संबंध नहीं थे। इसी कारण उसने कौशल्या की हत्या कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए उप जिला न्यायवादी नवीन चंद्र ने 14 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी के खिलाफ अभियोग को साबित किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ हत्या करने और सबूतों को मिटाने का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। इसके चलते अदालत ने आरोपी को उम्रकैद और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया।