{"_id":"67029499508f30629903cce8","slug":"clash-between-municipal-officials-and-councilors-over-illegal-construction-mandi-news-c-90-1-mrt1064-137350-2024-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mandi News: अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों में खींचतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mandi News: अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों में खींचतान
Mon, 07 Oct 2024 07:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 07 Oct 2024 07:13 AM IST
विज्ञापन
पार्षद का दावा, आयुक्त को लिखित और मौखिक में दिया जवाब
निगम ने नहीं किया राजस्व विभाग के साथ दौरा : पार्षद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम में अधिकारियों और पार्षदों में बढ़ी खींचतान कम नहीं हो रही है। ताजा मामला घरों में किए अवैध निर्माण को लेकर है। नगर निगम ने पूरे शहर में 306 लोगों को अवैध निर्माण के नोटिस भिजवाए हैं। इनमें 225 मामलों की अतिरिक्त आयुक्त कोर्ट में सुनवाई भी की जा रही है, लेकिन भाजपा पार्षद की माता और भाई की ओर से किए कथित अवैध निर्माण का मामला सुर्खियों पर है।
पार्षद खुद निगम कार्यालय में आकर बता चुके हैं कि उन्होंने कोई अवैध निर्माण नहीं किया है, जबकि अभी तक नोटिस भिजवाने के बाद निगम के अधिकारियों ने राजस्व विभाग के साथ उक्त पार्षद के घर का दौरा तक नहीं किया है। इससे पहले शौचालय को लेकर भाजपा पार्षद का विवाद भी सामने आया था। तब भी पार्षद का मानना था कि शौचालय के स्टोर की चाबी उनके पास नहीं है। बावजूद इसके उनका नाम उछाला गया। कई भाजपा पार्षद भी हाउस की बैठक में भी विकास कार्यों में मतभेद का आरोप निगम पर लगा चुके हैं।
बता दें कि जिस समय नगर निगम ने महंगे दाम पर कूड़े की गाड़ियां हायर की थीं, तब भाजपा पार्षदों ने इसका विरोध किया था। वर्तमान में मामले की विजिलेंस में जांच चल रही है। इसी विवाद के बाद से अधिकारियों और पार्षदों में तनातनी बढ़ी है। हाल में निगम की ओर से महंगे होटल में कार्यशाला का आयोजन किया गया था। वहां आयुक्त ने खुद माना था कि निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और पार्षदों में पिछले कई दिनों से मतभेद हैं। इन्हें दूर करने और वार्डों में विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए ही इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला के बाद कुछ पार्षदों और अधिकारियों ने व्हाट्स एप पर बने ग्रुप तक छोड़ दिए थे। अंदरखाते नगर निगम में सब ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में दोनों के बीच जनता पिस रही है।
विज्ञापन
उधर, नगर निगम के आयुक्त एचएस राणा का कहना है कि नियमों के तहत की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि ऐसा क्यों हो रहा, इस बारे में अधिकारी ही बता सकते हैं।
कोट्स
माता के घर समेत शहर में 306 लोगों को अवैध निर्माण के नोटिस भिजवाए गए हैं, लेकिन मुख्य टारगेट मुझे ही बनाया जा रहा है। माता का देहांत होने की वजह से समय पर नोटिस का जवाब नहीं दिया था, लेकिन बाद में आयुक्त के पास मौखिक और लिखकर दिया था कि जो घर है वह माता का है। उसमें भाई भी रहता है, जबकि मेरा नाम मुख्य रूप से उछाला जा रहा है। अभी तक निगम दूसरा नोटिस नहीं दे पाया है। न ही निगम के अधिकारियों ने राजस्व विभाग के साथ मौके पर जाकर निरीक्षण किया है।अगर गलती है तो कानूनी कार्रवाई की जाए।
-वीरेंद्र आर्य, पार्षद सन्यारड़
विज्ञापन
निगम ने नहीं किया राजस्व विभाग के साथ दौरा : पार्षद
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। नगर निगम में अधिकारियों और पार्षदों में बढ़ी खींचतान कम नहीं हो रही है। ताजा मामला घरों में किए अवैध निर्माण को लेकर है। नगर निगम ने पूरे शहर में 306 लोगों को अवैध निर्माण के नोटिस भिजवाए हैं। इनमें 225 मामलों की अतिरिक्त आयुक्त कोर्ट में सुनवाई भी की जा रही है, लेकिन भाजपा पार्षद की माता और भाई की ओर से किए कथित अवैध निर्माण का मामला सुर्खियों पर है।
पार्षद खुद निगम कार्यालय में आकर बता चुके हैं कि उन्होंने कोई अवैध निर्माण नहीं किया है, जबकि अभी तक नोटिस भिजवाने के बाद निगम के अधिकारियों ने राजस्व विभाग के साथ उक्त पार्षद के घर का दौरा तक नहीं किया है। इससे पहले शौचालय को लेकर भाजपा पार्षद का विवाद भी सामने आया था। तब भी पार्षद का मानना था कि शौचालय के स्टोर की चाबी उनके पास नहीं है। बावजूद इसके उनका नाम उछाला गया। कई भाजपा पार्षद भी हाउस की बैठक में भी विकास कार्यों में मतभेद का आरोप निगम पर लगा चुके हैं।
विज्ञापन
बता दें कि जिस समय नगर निगम ने महंगे दाम पर कूड़े की गाड़ियां हायर की थीं, तब भाजपा पार्षदों ने इसका विरोध किया था। वर्तमान में मामले की विजिलेंस में जांच चल रही है। इसी विवाद के बाद से अधिकारियों और पार्षदों में तनातनी बढ़ी है। हाल में निगम की ओर से महंगे होटल में कार्यशाला का आयोजन किया गया था। वहां आयुक्त ने खुद माना था कि निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और पार्षदों में पिछले कई दिनों से मतभेद हैं। इन्हें दूर करने और वार्डों में विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए ही इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला के बाद कुछ पार्षदों और अधिकारियों ने व्हाट्स एप पर बने ग्रुप तक छोड़ दिए थे। अंदरखाते नगर निगम में सब ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में दोनों के बीच जनता पिस रही है।
विज्ञापन
उधर, नगर निगम के आयुक्त एचएस राणा का कहना है कि नियमों के तहत की कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि ऐसा क्यों हो रहा, इस बारे में अधिकारी ही बता सकते हैं।
कोट्स
माता के घर समेत शहर में 306 लोगों को अवैध निर्माण के नोटिस भिजवाए गए हैं, लेकिन मुख्य टारगेट मुझे ही बनाया जा रहा है। माता का देहांत होने की वजह से समय पर नोटिस का जवाब नहीं दिया था, लेकिन बाद में आयुक्त के पास मौखिक और लिखकर दिया था कि जो घर है वह माता का है। उसमें भाई भी रहता है, जबकि मेरा नाम मुख्य रूप से उछाला जा रहा है। अभी तक निगम दूसरा नोटिस नहीं दे पाया है। न ही निगम के अधिकारियों ने राजस्व विभाग के साथ मौके पर जाकर निरीक्षण किया है।अगर गलती है तो कानूनी कार्रवाई की जाए।
-वीरेंद्र आर्य, पार्षद सन्यारड़