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Mandi News: 21वीं सदी में भी आस्था और परंपरा को संजोए है छोटी काशी
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महाशिवरात्रि महोत्सव की जलेब में दिखा युवा बजंतरियों और देवलुओं में आस्था के प्रति भारी उत्साह
केपी पांजला
मंडी। बेशक 21वीं सदी में डिजिटल का दौर है। लोगों की व्यस्तता के चलते गांवों में भी परंपराएं टूटने लगी हैं, रीति-रिवाज बदल रहे हैं, लेकिन इन सभी को मंडी जिला के देवी-देवता और ग्रामीण संभाले हुए हैं। अगली पीढ़ी यानी युवा इसे संजाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के शुभारंभ पर शनिवार को निकली हजारों की जलेब में 80 फीसदी बजंतरी और देवलु युवा थे। वे बुजुर्गों के साथ उनके बताए मार्ग पर चल रहे थे। अपनी संस्कृति और आस्था से उनका लगाव जलेब में नाच गानों से ही दिख रहा था। हर कोई युवा देवलु अपनी धुन में मस्त था। चौहाटा बाजार, गांधी चौक हो या सेरी मंच देवी-देवता भी एक दूसरे देवता से मिलकर देवलुओं को बजंतरियों के वाद्ययंत्रों पर झूमने पर मजबूर कर रहे थे। इससे पहले शनिवार सुबह 9 बजे ही देवी-देवताओं के साथ बजंतरी और देवलु शहर में जुटना शुरू हो गए। 11 बजे तक पूरी कोटी काशी वाद्ययंत्रों से गूंज उठी। गांवों से शहरों में बसे बुजुर्ग भी अपने देवता के दर्शन को चौराहों में खड़े रहे और आशीर्वाद लिया। करीब 3 बजे शहर में जलैब निकली तो हजारों लोगों ने देवी-देवताओं पर फूल बरसाकर उनका आशीर्वाद लिया।
वाद्ययंत्रों पर खुद भी झूमते रहे देवता
देवलु शनिवार 3 बजे जब जलेब गांधी चौक से पीछे पहुंची तो बड़ा देव सराज श्री विष्णु मतलोड़ा जलेब में एक मिनट तक झूमते रहे। उनके साथ चले सराज से पहुंचे सैकड़ो देवलु भी झूमते हुए आगे सेरी मंच की तरफ बढ़े। यहां लोगों ने बड़ा देव श्री विष्णु मतलोड़ा जी पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।
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केपी पांजला
मंडी। बेशक 21वीं सदी में डिजिटल का दौर है। लोगों की व्यस्तता के चलते गांवों में भी परंपराएं टूटने लगी हैं, रीति-रिवाज बदल रहे हैं, लेकिन इन सभी को मंडी जिला के देवी-देवता और ग्रामीण संभाले हुए हैं। अगली पीढ़ी यानी युवा इसे संजाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के शुभारंभ पर शनिवार को निकली हजारों की जलेब में 80 फीसदी बजंतरी और देवलु युवा थे। वे बुजुर्गों के साथ उनके बताए मार्ग पर चल रहे थे। अपनी संस्कृति और आस्था से उनका लगाव जलेब में नाच गानों से ही दिख रहा था। हर कोई युवा देवलु अपनी धुन में मस्त था। चौहाटा बाजार, गांधी चौक हो या सेरी मंच देवी-देवता भी एक दूसरे देवता से मिलकर देवलुओं को बजंतरियों के वाद्ययंत्रों पर झूमने पर मजबूर कर रहे थे। इससे पहले शनिवार सुबह 9 बजे ही देवी-देवताओं के साथ बजंतरी और देवलु शहर में जुटना शुरू हो गए। 11 बजे तक पूरी कोटी काशी वाद्ययंत्रों से गूंज उठी। गांवों से शहरों में बसे बुजुर्ग भी अपने देवता के दर्शन को चौराहों में खड़े रहे और आशीर्वाद लिया। करीब 3 बजे शहर में जलैब निकली तो हजारों लोगों ने देवी-देवताओं पर फूल बरसाकर उनका आशीर्वाद लिया।
वाद्ययंत्रों पर खुद भी झूमते रहे देवता
देवलु शनिवार 3 बजे जब जलेब गांधी चौक से पीछे पहुंची तो बड़ा देव सराज श्री विष्णु मतलोड़ा जलेब में एक मिनट तक झूमते रहे। उनके साथ चले सराज से पहुंचे सैकड़ो देवलु भी झूमते हुए आगे सेरी मंच की तरफ बढ़े। यहां लोगों ने बड़ा देव श्री विष्णु मतलोड़ा जी पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।
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