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चेक बाउंस केस : अपील खारिज, 10 माह की सजा बरकरार
Thu, 09 Oct 2025 06:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 09 Oct 2025 06:58 AM IST
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मंडी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुंदरनगर (अपीलीय अदालत) की अदालत ने चेक बाउंस मामले में अजय कुमार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है जिसमें दोषी को चेक बाउंस मामले में 10 माह के साधारण कारावास और 5.80 लाख रुपये मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया गया था।
सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक में विलय) की सुंदरनगर शाखा ने वर्ष 2018 में अजय कुमार निवासी गांव मल्हाणू तहसील बल्ह के विरुद्ध शिकायत दायर की थी। बैंक का आरोप था कि अजय कुमार ने बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट के तहत ऋण लिया था लेकिन नियमानुसार किस्तें अदा नहीं कीं।
बैंक की देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने 18 नवंबर 2017 को 5,36,932 रुपये का चेक जारी किया। जब बैंक ने चेक प्रस्तुत किया तो वह खाता बंद होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने 22 नवंबर 2017 को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन उसने न तो जवाब दिया और न ही भुगतान किया।
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6 नवंबर 2024 को सुंदरनगर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था।
अजय कुमार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और बैंक ने उसका दुरुपयोग किया लेकिन अदालत ने पाया कि दोषी ने स्वयं माना था कि उसने बैंक से 5 लाख रुपये का ऋण लिया था और नियमित भुगतान नहीं किया था।
सभी तथ्यों व साक्ष्यों पर विचार के बाद अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन किया है। अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को पूर्ण रूप से बरकरार रखा।
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सिंडिकेट बैंक (अब केनरा बैंक में विलय) की सुंदरनगर शाखा ने वर्ष 2018 में अजय कुमार निवासी गांव मल्हाणू तहसील बल्ह के विरुद्ध शिकायत दायर की थी। बैंक का आरोप था कि अजय कुमार ने बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट के तहत ऋण लिया था लेकिन नियमानुसार किस्तें अदा नहीं कीं।
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बैंक की देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने 18 नवंबर 2017 को 5,36,932 रुपये का चेक जारी किया। जब बैंक ने चेक प्रस्तुत किया तो वह खाता बंद होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने 22 नवंबर 2017 को कानूनी नोटिस भेजा लेकिन उसने न तो जवाब दिया और न ही भुगतान किया।
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6 नवंबर 2024 को सुंदरनगर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था।
अजय कुमार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और बैंक ने उसका दुरुपयोग किया लेकिन अदालत ने पाया कि दोषी ने स्वयं माना था कि उसने बैंक से 5 लाख रुपये का ऋण लिया था और नियमित भुगतान नहीं किया था।
सभी तथ्यों व साक्ष्यों पर विचार के बाद अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन किया है। अदालत ने अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को पूर्ण रूप से बरकरार रखा।