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Mandi News: उठाऊ पेयजल योजना के पास मवेशी के गले सड़े अवशेष मिलने से दहशत
Wed, 15 May 2024 02:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Wed, 15 May 2024 02:16 AM IST
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल जोगिंद्रनगर में जलशक्ति विभाग की एक उठाऊ पेयजल योजना के समीप रणा खड्ड में गले सड़े मवेशी के अवशेष मिलने से उपभोक्ताओं में दहशत फैल गई है। मैण भरोला और टिकरू पंचायत के सीमावर्ती क्षेत्र त्रिवेणी पुल के नीचे करीब दो सप्ताह पहले गिरने से एक मवेशी की मौत हो गई थी। इसके बाद शव को दफनाने में बरती गई लापरवाही से यह समस्या पेश आई है।
बीते कुछ दिन पहले हुई बारिश से मृत मवेशी के अवशेष और हड्डियों के रणा खड्ड में घुल मिलने से बीमारियों फैलने की आशंका प्रबल हो गई है। दुर्गंध फैलने से दोनों पंचायतों का वातावरण भी दूषित हो गया है। बावजूद उसके भी संबंधित विभाग यहां तक कि दोनों पंचायतों के प्रतिनिधी भी समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है।
मंगलवार को पंचायत के पूर्व प्रधान हरीश कुमार ने बताया कि करीब दो सप्ताह पूर्व रणा खड्ड के समीप एक मवेशी के गिरने से मौत हो गई थी। उसे दफनाने को लेकर उन्होंने संबंधित पंचायत के प्रतिनिधियों और जलशक्ति विभाग के अधिकारियों को भी सूचित किया था। मगर किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब अवशेष उठाऊ पेयजल योजना में मिलने से बिमारियां फैलने की आशंका है।
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बता दें कि इस योजना से लडभड़ोल क्षेत्र के करीब 25 हजार पेयजल उपभोक्ता लाभान्वित होते हैं। संसाल, बाग, रोपडू, सिमस, गोलवां और लडभड़ोल क्षेत्र के पेयजल उपभोक्ता भी इसी पेयजल योजना पर निर्भर है। ऐसे में अगर उपरोक्त गांवों के ग्रामीणों को दूषित पानी की आपूर्ति अगर सीधे ही हो चुकी है, तो जलजनित रोगों की आशंका भी बढ़ेगी।
जलशक्ति उपमंडल लडभड़ोल के सहायक अभियंता देशबंधु ने बताया कि उन्हें रणा खड्ड के समीप जैसे ही मृत मवेशी के गल सड़ चुके अवशेष और कंकाल मिलने की जानकारी मिली। इन्हें हटाने की कवायद शुरू कर दी है। पानी की आपूर्ति से पहले जल भंडारण टैंकों में क्लोरीन भी नियमित की जा रही है, जबकि सैंपल के परीक्षण के बाद ही पानी की आपूर्ति लडभड़ोल क्षेत्र के पेयजल उपभोक्ताओं को की जा रही है।
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बीते कुछ दिन पहले हुई बारिश से मृत मवेशी के अवशेष और हड्डियों के रणा खड्ड में घुल मिलने से बीमारियों फैलने की आशंका प्रबल हो गई है। दुर्गंध फैलने से दोनों पंचायतों का वातावरण भी दूषित हो गया है। बावजूद उसके भी संबंधित विभाग यहां तक कि दोनों पंचायतों के प्रतिनिधी भी समस्या के समाधान को लेकर गंभीर नहीं है।
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मंगलवार को पंचायत के पूर्व प्रधान हरीश कुमार ने बताया कि करीब दो सप्ताह पूर्व रणा खड्ड के समीप एक मवेशी के गिरने से मौत हो गई थी। उसे दफनाने को लेकर उन्होंने संबंधित पंचायत के प्रतिनिधियों और जलशक्ति विभाग के अधिकारियों को भी सूचित किया था। मगर किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अब अवशेष उठाऊ पेयजल योजना में मिलने से बिमारियां फैलने की आशंका है।
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बता दें कि इस योजना से लडभड़ोल क्षेत्र के करीब 25 हजार पेयजल उपभोक्ता लाभान्वित होते हैं। संसाल, बाग, रोपडू, सिमस, गोलवां और लडभड़ोल क्षेत्र के पेयजल उपभोक्ता भी इसी पेयजल योजना पर निर्भर है। ऐसे में अगर उपरोक्त गांवों के ग्रामीणों को दूषित पानी की आपूर्ति अगर सीधे ही हो चुकी है, तो जलजनित रोगों की आशंका भी बढ़ेगी।
जलशक्ति उपमंडल लडभड़ोल के सहायक अभियंता देशबंधु ने बताया कि उन्हें रणा खड्ड के समीप जैसे ही मृत मवेशी के गल सड़ चुके अवशेष और कंकाल मिलने की जानकारी मिली। इन्हें हटाने की कवायद शुरू कर दी है। पानी की आपूर्ति से पहले जल भंडारण टैंकों में क्लोरीन भी नियमित की जा रही है, जबकि सैंपल के परीक्षण के बाद ही पानी की आपूर्ति लडभड़ोल क्षेत्र के पेयजल उपभोक्ताओं को की जा रही है।