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Mandi News: मंडी में गरजे बीबीएमबी के छंटनी किए मजदूर
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मंडी में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रर्दशन करते हुए बीबीएमबी छंटनीकृत मजदूर यूनियन के सदस्य। सं
मंडी। बीबीएमबी से छंटनी किए गए मजदूरों ने शनिवार को मंडी शहर में मांगों के समर्थन में जोरदार रैली निकाली। मजदूरों ने खूब हल्ला बोला और जोरदार नारेबाजी की। सीटू के सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि जिन लोगों ने बीएसएल प्रोजेक्ट के निर्माण में अपनी जिंदगी लगा दी और आज बुढ़ापे में हैं तो इन्हें कभी एक अदालत का कभी दूसरी अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। कहा कि मजदूर लगातार सरकारों से मांग करते आए हैं, लेकिन सरकारें संवेदनहीन हो गई हैं और मजदूरों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
कहा कि अभी दिसंबर में एक केस में श्रम अदालत चंडीगढ़ का फैसला आया है। इसके अनुसार जिन मजदूरों को जिन्होंने एक से पांच साल तक नौकरी की है, उन्हें 25 हजार रुपये और जिन लोगों ने 5 साल से ऊपर नौकरी की है, उन्हें 50 हजार रुपये का मुआवजा ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। कहा कि अदालत का यह फैसला स्वागत योग्य है परंतु इसमें मुआवजा राशि बेहद कम है। कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार को ज्ञापन देकर मांग की है कि इस मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए।
कहा कि सभी मजदूरों पर यह फैसला लागू होना चाहिए और इसका मुआवजा बढ़ना चाहिए। आज ये मजदूर 60 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। रोजगार अब इन्हें देना तो संभव नहीं है। ऐसे में मांग है कि उनके परिवार से एक सदस्य को नौकरी दी जाए। जिन मजदूरों ने 10 साल से ज्यादा नौकरी की है, उनको पेंशन दी जाए। सभी मजदूरों को मेडिकल सुविधा प्रधान की जाए। सीटू सचिव राजेश ने कहा कि यदि बीबीएमबी और सरकार फैसला लागू नहीं करती तो मजबूरन संघर्ष को आगे बढ़ाना पड़ेगा। इस मौके पर परस राम और जीत राम ने भी मजदूरों के हकों के लिए जोरदार आवाज उठाई। संवाद
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कहा कि अभी दिसंबर में एक केस में श्रम अदालत चंडीगढ़ का फैसला आया है। इसके अनुसार जिन मजदूरों को जिन्होंने एक से पांच साल तक नौकरी की है, उन्हें 25 हजार रुपये और जिन लोगों ने 5 साल से ऊपर नौकरी की है, उन्हें 50 हजार रुपये का मुआवजा ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। कहा कि अदालत का यह फैसला स्वागत योग्य है परंतु इसमें मुआवजा राशि बेहद कम है। कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार को ज्ञापन देकर मांग की है कि इस मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए।
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कहा कि सभी मजदूरों पर यह फैसला लागू होना चाहिए और इसका मुआवजा बढ़ना चाहिए। आज ये मजदूर 60 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। रोजगार अब इन्हें देना तो संभव नहीं है। ऐसे में मांग है कि उनके परिवार से एक सदस्य को नौकरी दी जाए। जिन मजदूरों ने 10 साल से ज्यादा नौकरी की है, उनको पेंशन दी जाए। सभी मजदूरों को मेडिकल सुविधा प्रधान की जाए। सीटू सचिव राजेश ने कहा कि यदि बीबीएमबी और सरकार फैसला लागू नहीं करती तो मजबूरन संघर्ष को आगे बढ़ाना पड़ेगा। इस मौके पर परस राम और जीत राम ने भी मजदूरों के हकों के लिए जोरदार आवाज उठाई। संवाद
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