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Mandi News: बस्सी के उपप्रधान की अपील खारिज
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थुनाग/गोहर (मंडी)। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त मंडी ने विकास खंड गोहर की ग्राम पंचायत बस्सी के उपप्रधान को एसडीएम कोर्ट गोहर की ओर से अयोग्य घोषित करने का फैसला बरकरार रखा है। एसडीएम कोर्ट गोहर ने फरवरी में सुनवाई के दौरान उपप्रधान के चयन को वन भूमि पर अतिक्रमण करने के कारण निरस्त किया था। उपप्रधान ने एसडीएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ उपायुक्त मंडी के समक्ष अपील दायर की थी। इसे उपायुक्त मंडी ने सोमवार को खारिज कर दिया है।
2021 में हुए पंचायत चुनाव में उपप्रधान के चयन को बस्सी पंचायत के भीम सिंह निवासी कुटला और यशवंत सिंह निवासी कटवांढी ने निर्वाचन अधिकारी गोहर के समक्ष चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उपप्रधान पद के लिए गुरदेव सिंह ने नामांकन दाखिल किया था और शपथ पत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने की बात छुपाई थी। गुरदेव सिंह के पिता डोले राम ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया था जिसकी मिसल बनी हुई है।
यह पंचायतीराज अधिनियम की धारा 122 का उल्लंघन है। शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम कोर्ट के समक्ष आरोप से संबंधित पूरे साक्ष्य रखे। इसमें उपप्रधान गुरदेव सिंह पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। इस पर उपप्रधान पद पर गुरदेव सिंह के चयन को अवैध करार दिया। उपप्रधान ने एसडीएम के फैसले को उपायुक्त मंडी के समक्ष अपील दायर कर चुनौती दी थी। अपीलकर्ता का तर्क था कि चुनाव के दौरान उसके शपथपत्र को किसी ने चुनौती नहीं दी और न ही उसके परिवार ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है। उपायुक्त ने उपप्रधान के तर्कों को निरस्त करते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया है। फैसले की पुष्टि शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता पवन कुमार ने की है।
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समय पर न्याय न मिलना अन्याय
लंबी न्यायिक प्रक्रिया से आहत शिकायतकर्ताओं भीम सिंह और यशवंत ने बताया कि उपप्रधान का कार्यकाल पूरा होने में मात्र एक साल बचा है। कहा कि निर्वाचन को चुनौती मिलने के बद ऐसे निर्वाचित व्यक्तियों को सरकारी कामकाज नहीं दिया जाना चाहिए।
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2021 में हुए पंचायत चुनाव में उपप्रधान के चयन को बस्सी पंचायत के भीम सिंह निवासी कुटला और यशवंत सिंह निवासी कटवांढी ने निर्वाचन अधिकारी गोहर के समक्ष चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उपप्रधान पद के लिए गुरदेव सिंह ने नामांकन दाखिल किया था और शपथ पत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने की बात छुपाई थी। गुरदेव सिंह के पिता डोले राम ने सरकारी भूमि पर कब्जा किया था जिसकी मिसल बनी हुई है।
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यह पंचायतीराज अधिनियम की धारा 122 का उल्लंघन है। शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम कोर्ट के समक्ष आरोप से संबंधित पूरे साक्ष्य रखे। इसमें उपप्रधान गुरदेव सिंह पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। इस पर उपप्रधान पद पर गुरदेव सिंह के चयन को अवैध करार दिया। उपप्रधान ने एसडीएम के फैसले को उपायुक्त मंडी के समक्ष अपील दायर कर चुनौती दी थी। अपीलकर्ता का तर्क था कि चुनाव के दौरान उसके शपथपत्र को किसी ने चुनौती नहीं दी और न ही उसके परिवार ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है। उपायुक्त ने उपप्रधान के तर्कों को निरस्त करते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया है। फैसले की पुष्टि शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता पवन कुमार ने की है।
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समय पर न्याय न मिलना अन्याय
लंबी न्यायिक प्रक्रिया से आहत शिकायतकर्ताओं भीम सिंह और यशवंत ने बताया कि उपप्रधान का कार्यकाल पूरा होने में मात्र एक साल बचा है। कहा कि निर्वाचन को चुनौती मिलने के बद ऐसे निर्वाचित व्यक्तियों को सरकारी कामकाज नहीं दिया जाना चाहिए।

महंगापुर के श्री गुरु तेग बहादुर स्कूल में कबड्डी में प्रतिभाग करते स्कूली बच्चे। संवाद